समाज में शांति, बंधुत्व और शिक्षा से ही वास्तविक समानता संभव : प्रवीण बागडे
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नागपुर। नागपुर के लष्करीबाग स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मिशन सभागृह में शनिवार, २३ मई २०२६ को बहुजन हिताय संघ की ४७१ वीं साप्ताहिक सभा उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक न्याय विभाग के पूर्व उपायुक्त श्री संजीव गाडे ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में प्रशासनिक अधिकारी एवं साहित्यकार श्री प्रवीण बागडे उपस्थित थे, जबकि विशेष अतिथि के रूप में सहायक पुलिस आयुक्त डॉ. अशोक बागुल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत तथागत गौतम बुद्ध एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर त्रिशरण, पंचशील और बुद्ध वंदना से हुई। बौद्धाचार्य देविदास राऊत ने आनापानसति का मार्गदर्शन किया। प्रमुख अतिथि प्रवीण बागडे ने उपस्थित जनों से २२ प्रतिज्ञाएं दिलवाईं तथा अपने संबोधन में समाज में शांति, बंधुत्व और सामाजिक एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही वास्तविक सामाजिक समानता स्थापित हो सकती है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता व्यक्त की। संस्था की ओर से उन्हें स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सभा में विभिन्न वक्ताओं ने धम्म, समाज प्रबोधन, शिक्षा और सामाजिक एकता विषयों पर मार्गदर्शन किया। विशेष अतिथि डॉ अशोक बागुल ने कहा कि बहुजन हिताय संघ वास्तव में मानवतावादी विचार प्रस्तुत करनेवाला सामाजिक संगठन है और उन्हें इस संगठन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर मनुष्य का मूल्यांकन नहीं होना चाहिए तथा मानवता को सर्वोच्च मानने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में आयु. संजीव गाडे ने कहा कि बौद्ध धम्म स्वीकार करने के लिए विधिवत दीक्षा आवश्यक है तथा सामाजिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। दिन विशेष अंतर्गत आयु. प्रकाश सोनटक्के ने १६ से २३ मई के दौरान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी दी। वहीं ज्ञानेश्वर वाकडे ने २४ से ३० मई के बीच जन्मदिन आने वाले धम्मसेवकों को शुभकामनाएं दीं।
शारदाताई मोटघरे ने श्रीलंका में बौद्ध धम्म और वहां की अनुशासन व्यवस्था की जानकारी दी, जबकि हरिश कावरे ने काव्य के माध्यम से मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन हेमंत शिंगोडे ने किया तथा आभार प्रदर्शन चुन्नीलाल जांभूळकर ने किया। समापन गाथा प्रा. नंदाताई भगत ने प्रस्तुत की तथा वर्षाताई टेंभेकर, मंगलाताई राऊत और संगीताताई पानतावणे ने राष्ट्रगान प्रस्तुत कर सभा का समापन किया।
