गरीबी का दंश : विकास के दावों के बीच संघर्षरत जीवन
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस विशेष 17 अक्टूबर गरीबी बहुत बुरी बीमारी है, यह अपने साथ सैकड़ों समस्याओं को लेकर आती है और जीवनमान और विकास को चरमरा देती हैं। लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता गरिबी मुक्त देश बनाने में रोड़े खड़े करती है, ऊपर से महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी गरीबी कम होने नहीं देती। हर क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद दबाव बने रहता हैं। मिलावटखोरी, प्रदूषण, कांक्रीट के बढ़ते जंगल और कटते वन ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाते है, इससे प्राकृतिक आपदाएं आती है, बीमारियां बढ़ती है, सेहत पर बुरा असर पड़ता है, जिसकी सबसे बड़ी मार गरीब तबके को झेलनी पड़ती हैं। गरीब तबके को विविध सरकारी योजनाओं के बावजूद योग्य जीवनमान स्तर तक पहुंचने में बेहद मुश्किलें आती हैं। विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 अनुसार, देश में शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 58 प्रतिशत और 65 प्रतिशत राष्ट्रीय संपत्ति है, जबकि निचले तबके के 50 फीसदी जनसंख्या के पास केवल 15 प्रतिशत राष्ट्रीय आय का हिस्सा हैं। शीर्ष 1 फीसदी के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं। विश्व आर...