उषा किरण आत्राम आदिवासी समुदाय की बुद्धीजीवी नेता है : डॉ. सतीश पावडे
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अतिथीयों के करकमलो द्वारा हुआ पांच ग्रंथों का विमोचन
नागपुर। आदिवासी लेखिका उषा किरण आत्राम - ताराम आदिवासी समुदाय की बुद्धीजीवी नेता और आदिवासी साहित्य में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस क्षेत्र में उनकी निरंतरता सराहनीय है। नाटककार और आलोचक डॉ. सतीश पावडे ने कहा, उनका नाटक ' अहेराचा बदला अहेर ' सिर्फ आदिवासी समुदाय का आईना नहीं है बल्कि एक संदर्भ ग्रंथ है ।
हिंदी मोरभवन के अर्पण सभागार में गोंडवाना दर्शन संपादक मंडल, आदिवासी भाषा शोध संस्थान धनेगाव और माय मराठी नक्षत्र प्रतिष्ठान के सहयोग से 'गोंडवाना दर्शन' पत्रिका की संस्थापक संपादक उषा किरण आत्रात ताराम द्वारा लिखित और संपादित नाटक 'अहेराचा बदला अहेर', 'गोंडवाना की जमापूंजि' वैचाारिक लेख संग्रह, सून्हेरसिंह ताराम स्मृति विशेष अंक 'गोंडवाना दर्शन', मनिरावन दुग्गा दवारा लिखित 'गोंडी व्याकरण', एच. एम. पोटनाखे द्वारा लिखित 'लोकनायक बिरसा मुंडा' इन पांच ग्रंथों का विमोचन समोराह शनिवार को आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक एवं आदिवासी समाजचिंतक डॉ. वासुदेव डहाके द्वारा कि गयी जबकि नाट्यलेखक एवं आलोचक डॉ. सतीश पावडे, सहायक संपादक, द कारवां इंग्रजी मासिक डॉ. आकाश पोयाम, इतिहास लेखक डॉ. शामराव कोरेती, आंदोलनकारी एवं जंगल विशेषज्ञ अॅड. लालसू नागौटी और साहित्य आलोचक डॉ. वैजनाथ अनमुलवाड़ा ने प्रमुख मार्गदर्शक के तौर पर उपस्थित थे। अतिथीयों द्वारा पांच ग्रंथों को विमोचन किया गया।
डा. सतीश पावडे ने नाटक अहेराचा बदला अहेकर पर प्रकाश डाला। नाट्य लेखिका उषा आत्राम द्वारा लिखे गये कहानी का यह नाट्य रूपांतर सराहनीय है, ऐसा कहा। डा. आकाश पोयाम ने गोंडवाना दर्शन के संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि समय के साथ भाषा की मौत कैसे हुई, इसके लिए राजनीतिक नीति कैसे जिम्मेदार है।
साहित्य समाज में बुद्धीजीवियों का निर्माण करता है, ऐसा उन्होने कहां। गोंडवाना की जमापूंजी पर डॉ. शाम कोरेटी ने प्रकाश डाला, जबकि गोंडवाना दर्शन तारामजी स्मृति विशेषांक पर अॅड. लालसू नागोटी ने अपने विचार सांझा किये। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. वासुदेव डहाके ने आदिवासी के क्षेत्र में वर्षा आत्राम द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
उषा आत्राम ने अपनी प्रस्तावना में बताया कि किस तरह अहेराचा बदला अहेर यह नाटक सत्य कहानी पर आधारित है, जिसमें अहेर के बदले में आदिवासी लड़कियों का कैसे शोषण किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मातृसत्ताक व्यवस्था का जिक्र किया। मानव निर्माण जब हुआ तब पहली भाषा के रूप में गोंडी सामने आयी। कहा जाता है कि उनकी बोलियों जो बनी उनमें इतिहास, लोक नाट्य, सामाजिक जीवन, धार्मिक परंपराओं जैसे लोक हितों का साहित्य है।
मध्य प्रदेश से आयी गोडियन चैरिटी की ट्रस्टी संध्या धुर्वे ने इस समय आदिवासी बच्चों की शिक्षा हेतु उपहार के रूप में 30,000 रुपये की राशि भेंट की। चंद्रलेखा कंगाले, संध्या धुर्वे, भरत टेकम आदि का इस समय सत्कार किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन अरुणा भोंडे और डॉ. वैजनाथ अनमुलवाडे द्वारा किया गया। दिशा गेडाम ने संविधान पठन किया जबकि बिच्चू वड्डे ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।