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युद्ध उन्माद

हैवान है वह इंसानियत जो भूल चुका,  वो पागल भूपति। ओ रे हैवान , तूने नहीं देखी माँ की नम आँखें। बिलखते शिशु सब भूखे तड़पते, दम तोड़ते  काश तू...

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आज ईद

उफ़ यह रात ये काली रात, इक मुट्ठी ख़ुशी  तलाशती रात, और सीना फाड़  रोती रात। ज़मीन के टुकड़े के  लिए पागल ये दुनिया, डॉलर की चकाचौंध से अंधी...

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नारी सक्षम है

ना अबला ना बेचारी हूं मैं कलयुग के नारी हूं   हा मै 2 हा मैं सब पर ही भारी हूं  हा मैं कलयुग के नारी हूं  बेटी बनकर आंगन खेली, उपवन मैंने मह...

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युद्ध : एक महाशून्य

- प्रा. रवि शुक्ला, अबु धाबी (यूएई) युद्ध क्या है? कुछ लोगों के अहं का विस्तार, और कुछ ही क्षणों में असंख्य सपनों का संहार। तोप चले या मिसाइ...

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रंगों का त्योहार..

रंगों का त्योहार यह प्यारा  अपनो के संग सबसे न्यारा  होली आई, रंग लाई, संग अपने  ढेरो खुशियाँ लाई। लाल, गुलाबी, पीला, नीला, रंगों ने सबके मन...

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सरहद

बात हो रही सरहद से आज हिंदुस्तान की, दीवार बन सीमा पर जो रक्षा कर रहे गुलिस्तान की l हो कैसी भी मुश्किले हम नहीं डर जाएंगे, अपने प्यारे देश ...

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मेरी वेलेंटाइन

दिल के तार बज उठते हैं, जो तू महफ़िल में आती है, रोशन होती है अंधेरी दुनिया,  जो तू मुस्काती- बलखाती है, मतवाली ज़ुल्फ़ जो तेरी लहराती है,  ...

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ग़ज़ल

तहरीर कर लिया है हर इक ज़िन्दगी का रंग  तू भी तो देख ले ज़रा मेरी ख़ुशी का रंग  नफ़रत मिली कभी कभी फटकार भी मिली  मैं ने बहोत तलाश किया आशिक...

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ग़ज़ल

बे- सदा और बे-तलब कोई  इस तरह जी सके गा अब कोई  फिर उसी मोड़ पे वो छोड़े गा  दिल को बहाने लगे गा जब कोई  न हुआ दोस्त हो जा दुश्मन ...

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शांति यात्रा

कटुता को प्रेम के तराजू में तोलने, पाक चले हैं अटलजी कुछ बोलने। दोनों देश के संबंध सुधरे, इस बात से अब न कोई मुकरे। दो देशवासियों के दिलों क...

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रामभरोसे

हो गये थे, गल्ली में बोर। लगाकर, धन-बल का ज़ोर। हम भी चले, दिल्ली की ओर। हैलो -हाय, बाय -बाय टाटा। वहां खाएंगे, शुद्ध घी का परांठा। मेहरबान ...

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रोटियां

बहुत सितम ढाती है रोटियां जब नजर नही आती है रोटियां, अमीरों के थाली मे मख्खन लगी गरीब के थाली मे सूख जाती है रोटियां। दो वक्त के जरूरत के खा...

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प्यारी शीत ऋतु

नवल रूप में शीत ऋतु धरती पर आई  ताप रहे सूरज दादा को शीतलता उन्होंने पहुंचाई शीत ऋतु पर प्रकृति भी धीरे से मुस्कुराई  रात में ओस की बूंदो ने...

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ठीक नहीं है

हरदम उँगली उठाने का चलन ठीक नहीं है  बेवज़ह दोषारोपण का चलन ठीक नहीं है। अँधेरा भगाने को एक चिराग ही बहुत है  रोशनी की खातिर घर का दहन ठीक न...

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विभीषिका

आसमान बन गया है आफत हतबल हुई मनुष्य की ताकत प्रकृति के आगे विवश,  बेबस हताश मनुज ज्ञान, विज्ञान, तंत्रज्ञान हुये अनुज। कुदरत का हुआ रूप विकर...

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तुम्हारी चिट्ठी

ख़ाली चिट्ठी भेज के तुमने अपना वादा पूरा किया,  खोल के देखा  पूरा खाली था,  आगे पीछे  उपर नीचे  सब खाली था, हमने पूछा यह क्या भेजा तुमने कहा...

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हां! मैं मधुशाला जाता हूं

हां! मैं मधुशाला जाता हूं अपनी सुधा मिटाने को  मृगतृष्णा को पाने को  थोड़ा सा बुदबुदाने को  मन को अपने समझाने को  हां! मैं मधुशाला जाता हूं ...

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इन दिनों..

चोरी हो रहा है हमारा, सब कुछ, इन दिनों। बडी चतुराई से चुरा लिया है इसने, हमारा बडा ही कीमती समय। अपना समय नहीं बचा अब अपने लिए। दूसरों को पढ...

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गुरु बिन ज्ञान नहीं

गुरु शिष्य की रीत पुरानी गुरु है सबसे बड़ा ज्ञानी  गुरु बिन नहीं मिले हैं ज्ञान  बन्दे कर ले गुरु का मान।  गुरु ने हमको पाठ पढ़ाया   और अक्ष...

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इह लोक में विघ्नहर्ता

धरती में मच रहा हाहाकार, सुनकर भक्तों की पुकार, लंबोदर हुए कुछ ऐसे विचलित  बोले भक्तों, “न होओ भयभीत।” उमाशंकर को किया प्रणाम , जंबूदिप को क...

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