विदर्भ के युवाओं के लिए अपना स्वतंत्र सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र आवश्यक
नागपुर सहित विदर्भ के 11 जिले को आई टी सेक्टर से जोड़ना अब जरुरी
नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। हाल ही में वर्ष 2021 का शीतकालीन सत्र महाराष्ट्र सरकार ने नहीं लिया।महाराष्ट्र में मराठवाड़ा, विदर्भ, कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उपरोक्त सभी मे से केवल विदर्भ क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है। महाराष्ट्र के पूर्व नेताओं द्वारा केवल पुणे, मुंबई, सातारा, कोल्हापुर, नासिक, जलगांव, बारामती का ही विकास किया! पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विदर्भ के पक्ष में नहीं है।
पुणे में आजकल उच्च स्तर पर स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र कोरोना के प्रसार के कारण विफल रहा है। महामारी फैलने के कारण आईटी सेक्टर की कई कंपनियों के कार्यालय खाली हैं। इसके कारण वर्तमान में विदर्भ क्षेत्र के युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है। तो भविष्य में विदर्भ के कुल ग्यारह जिलों में नागपुर सहित सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का विकास हो सकता है। इसके लिए सभी जिलों में कम से कम दस बड़े सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग स्थापित करें।
इसकी स्थापना के बाद न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर भी यह विदर्भ क्षेत्र विशेष सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र होगा। आजकल नागपुर में 24 मेट्रो स्टेशन हैं। अगर हमारी केंद्र सरकार सभी ग्यारह जिलों में इस प्रकार की मेट्रो रेलवे स्टेशन की स्थापना करे। ग्यारह जिले अमरावती, गोंदिया, अकोला, चंद्रपुर, भंडारा, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, वाशिम, नागपुर सहित गढ़चिरौली हैं। तब यह सूचना प्रौद्योगिकी कर्मचारियों के लिए फलदायी होगा। उससे हमारा विदर्भ पिछड़े क्षेत्र की कतार में नहीं होंगा। अभी यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हमारे विदर्भ क्षेत्र के अधिकांश युवा केवल बंगलुरु, पुणे, मुंबई सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर निर्भर हैं।
साथ ही सभी युवा भारतीय रेलवे का उपयोग कर रहे, ये युवा दस से बारह घंटे तक रेलवे मे सफर करते हैं। साथ ही साथ उन्हे अपने परिवार से भी दूर रह ना पडता हैं। इन युवकों को नौकरी मिल भी जाए तो उन्हे अपने घर से 800 से 900 किमी दूर जाना पड़ता है। साथ ही साथ नौकरी कर रहे युवाओं को मज़बुरी में पुणे, बंगलुरु, मुंबई में महंगा फ्लैट, कमरे किराये से लेना पडता है। आजकल कमरों और फ्लैटों का किराया पुणे, मुंबई, बंगलुरु मे 20 हजार से 30 हजार रुपये प्रति माह है। कुछ युवा सूचना प्रौद्योगिकी की सैलरी पैकेज 20 हजार रुपये से 30 हजार रुपये प्रति माह रहती है। फिर वे इस खर्च को कैसे मैनेज करे। इस महँगे जमाने में अब बस यही सवाल है।
इसलिए विदर्भ क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी विकास योजना आवश्यक है। ताकि सभी शिक्षित सूचना प्रौद्योगिकी युवाओं को नौकरी मिले। माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार के मंत्री नितिन गडकरी से विदर्भ की जनता का विशेष अनुरोध है कि विदर्भ सेक्टर के ग्यारह जिले के युवाओं के लिए बहुयामी सूचना प्रौद्योगिकी विकास विकास के लिए विचार करें। आजकल कोरोना, ओमीक्रोन पूरी दुनिया में फैल गया। इसलिए विदर्भ क्षेत्र में पृथक रोजगार सेवा क्षेत्र आवश्यक है।