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हिंदी भारत का प्राण, स्वाभिमान व गौरवगान है : प्रो. के. पी. यादव


नागपुर/पुणे। एक हजार वर्ष की ऐतिहासिक परंपरा धारण करनेवाली हिंदी भारत का प्राण, स्वाभिमान व गौरवगान है। ये विचार मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर, छ.ग. के कुलपति डाॅ. के. पी. यादव ने व्यक्त किए। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उ. प्र. तथा मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर, छ.ग. के संयुक्त तत्वावधान में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 'वैश्विक स्तर पर हिंदी' विषय पर आयोजित आभासी राष्ट्रीय गोष्ठी में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन दे रहे थे। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज के अध्यक्ष, डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। कुलपति प्रो. यादव ने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी ज्यादा बोली, लिखी और पढी जानेवाली भाषा है। भारत के बाहर 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन अध्यापन चल रहा है। भारतीय संविधान के अनुसार हिंदी राजभाषा बन पायी है, लेकिन राष्ट्रभाषा नहीं।

छ.ग. की वरिष्ठ महिला साहित्यकार डाॅ. सत्यभामा अडिल ने का कि आज हिंदी की लोकप्रियता बढ रही है लेकिन नागरी लिपि पीछे छूट रही है। हिंदी के शब्द रोमन लिपि में लिखे जा रहे हैं।अत: लिपि देवनागरी को आनेवाले संकट से बचाना होगा। प्रवासी भारतीय आज भी भीतर से भारतीय हैं।

शासकीय दुधाधारी बजरंग महाविद्यालय की हिंदी विभाग अध्यक्षा डाॅ. सविता मिश्रा ने  कहा कि हिंदी न केवल साहित्य की भाषा है बल्कि वह बाजार की भाषा है। माॅरिशस में हिंदी का वर्चस्व है।जापान में 1908 से हिंदी पढाई जाती है।
डाॅ. हेमंत पाल घृतलहरे, महासमुंद, छ. ग. ने कहा कि जिस दिन हम हिंदी में सोचने लगेंगे, चिंतन करने लगेंगे, जीने लगेंगे उसी दिन से हिंदी की सारी समस्याएँ दूर हो जाएँगी।

डाॅ. अर्चना पांडे ने कहा कि हिंदी एक विज्ञान सम्मत भाषा है। डाॅ. आरती बोरकर ने कहा कि हिंदी का भविष्य स्वर्णिम है। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, के सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने कहा कि पूरे विश्व में हिंदी बोलनेवालों की संख्या करोडो में है। 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी अध्ययन केंद्र है। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष डाॅ. शहाबुद्दीन शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि लगभग तीन करोड प्रवासी भारतीयों ने  हिंदी को सही मायने में  वैश्विक मंच प्रदान किया है। 

डाॅ. सरस्वती वर्मा, महासमुंद, छ.ग. ने प्रस्तावना में कहा कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान तथा सोशल मिडिया के क्षेत्र में हिंदी का भरपूर प्रयोग हो रहा है। मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डाॅ. रेश्मा अन्सारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि हिंदी को विश्वमंच पर मजबूती से स्थापित करने के लिए मानक हिंदी के प्रयोग की नितांत आवश्यकता है। डाॅ. सोनाली चेन्नावर की सरस्वती वंदना से गोष्ठी का आरंभ हुआ। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान की छत्तीसगढ इकाई की प्रभारी व हिंदी सांसद, डाॅ. मुक्ता कौशिक, रायपुर ने गोष्ठी का संचालन किया तथा प्रा. लक्ष्मीकांत वैष्णव, चांपा, जांजगीर ने आभार ज्ञापन किया।

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