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मृग बहार मौसम के संतरों की आवक आधी हुई


४०० के स्थान पर २०० टैंपो की विदर्भ से आवक


नागपुर(आनंदमनोहर जोशी)। कलमना कृषि उत्पन्न बाजार समिति के फल बाजार यार्ड में मृग बहार संतरा की आवक जहां गत सप्ताह में ४०० टैंपो हुआ करती थीं। अब मृग बहार के संतरे विदर्भ के नरखेड, कोंढाली, अमरावती, काटोल  आदि परिसर के बागानों से हो रही है। जहां पूर्व में संतरे के भाव ३०/- से ४०/- प्रति किलो थोक बाजार में थे। इन दिनों संतरों की विविध प्रकार की क्वालिटी के भाव ३५/- से ५५/- प्रति किलो थोक बाजार में चल रहे है। 


थोक फल व्यवसाई और आढ़तीया कन्हैया छाबरानी के अनुसार मृग बहार की संतरे की फसल घटकर आधी रह गई है। उन्होंने बताया कि जहां पहले विदर्भ के अनेक हिस्सों से ४०० टेम्पो संतरों की आवक हो रही थी। अब घटकर यह आवक २०० टेम्पो तक रह गई है। छाब रानी के अनुसार इस साल अच्छी क्वालिटी के संतरे देशभर में बिके। साथ ही विदेश भी भारत से संतरा नेपाल और पड़ोसी देशों को भी बेचा जा रहा है।  खुदरा में विदर्भ का संतरा रेल्वे स्टेशन के प्लेटफार्म पर १००/- से २००/- प्रति दर्जन बिक रहा है। 

संतरा बर्फी के भाव इस समय ६५०/- प्रति किलो चल रहे है।देशभर में नागपुर का संतरा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई,जयपुर,कानपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि शहरों के लिए बिक्री किया जा रहा है। संतरे के व्यवसाय में सैकड़ों पुरुषों के साथ साथ महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। संतरे प्लास्टिक करेट्स के साथ साथ अब लकड़ी की पेटी, कागज के कोरुगेटेड बॉक्स में भी पेकिंग किए जा रहे है। कलमना कृषि उत्पन्न बाजार के फल मार्केट में इस समय ५ बड़े यार्ड में संतरों के ढेर लग रहे है। 

नागपुर के कलमना बाजार के साथ संतरे की बिक्री मुख्य रेल्वे स्टेशन नागपुर के पूर्वी द्वार, पश्चिमी द्वार , इतवारी, अजनी स्टेशन, शहर के अनेक बाजारों के साथ विभिन्न प्लेटफार्म पर भी हो रही है। जहां पहले नागपुर का संतरा न्यूयॉर्क, अमेरिका,रूस भी जा रहा था। पिछले दस से ग्यारह दिनों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संतरा यूरोप भी जाना कम हो गया है। संतरे की गर्मी में काफी मांग रहती है। संतरे का जूस, संतरे का एसेंस बनाने में भी प्रयोग होता है। 

नागपुर में देश भर से यात्रा करने आ रहे पर्यटक संतरे के ठंडे पेय, संतरा बर्फी की खरीदारी करते है। इन दिनों गर्मी के मौसम में ऑरेंज बर्फी,ऑरेंज क्रीम बिस्कुट , ऑरेंज फ्लेवर फालूदा आइसक्रीम की भी मांग बढ़ जाती है। ऑरेंज की पेकिंग के लिए रद्दी पेपर का प्रयोग बड़े पैमाने पर तनस, घास के साथ हो रहा है। रद्दी पेपर के दाम १४/- प्रति किलो से बढ़कर २०/- प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। संतरे की पेकिंग के लिए गोंदिया, भंडारा सहित अनेक इलाकों से तनस, घास के ट्रक की आवक हो रही है।
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