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व्यक्तित्व विकास की पीठिका है मातृभाषा : श्रद्धा भारद्वाज


नागपुर। मातृभाषा ही व्यक्ति के चिंतन की भाषा होती है। वही व्यक्ति के समग्र विकास की पीठिका होती है। भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन मातृभाषा को संजोकर ही किया जा सकता है। उक्त विचार व्यक्त करते हुए आकाशवाणी की उद्घोषिका श्रीमती श्रद्धा भारद्वाज ने मातृभाषा के महत्त्व को रेखांकित किया। वे हिन्दी विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, विदर्भ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस कार्यक्रम में बतौर प्रमुख अतिथि बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर आज मातृभाषाओं के विकास के संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जिस प्रकार मातृभाषाएं विलुप्त होती जा रही हैं, वह चिंता का विषय है। इसीलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा के प्रोत्साहन पर बल दे रही है।
 
अतिथि वक्ता प्रख्यात संस्कृतिकर्मी श्री किशोर लालवानी ने कहा कि जिस प्रकार बालक के जीवन में माता का महत्त्व होता है, उसी प्रकार मातृभाषा का अनन्य महत्त्व होता है। व्यक्ति के विचारों को पुष्पित, पल्लवित करने में मातृभाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। मातृभाषा के अभाव में समाज निष्प्राण हो जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय पल्वेकर ने कहा कि भारत बहुभाषी राष्ट्र है। इसलिए प्रत्येक भाषा में अन्य बोली-भाषा के शब्द अनायास आ ही जाते हैं। वास्तव में, मातृभाषा में पारंगत होने पर ही हम अन्य भाषाओं को आसानी से सीख सकते हैं। मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं वरन यह संस्कृति का संवाहक है। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए प्रा.जागृति सिंह ने कहा कि मातृभाषा के मूल में लोक-संस्कृति होती है। संस्कृति से समाज में जीवन-मूल्यों का संवर्धन होता है। इसलिए मातृभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा की प्रासंगिकता विचारणीय है।

 इस अवसर पर डॉ. लखेश्वर चन्द्रवंशी, डॉ. कुंजनलाल लिल्हारे, डॉ. एकादशी जैतवार, प्रा.दामोदर द्विवेदी, आकांक्षा बांगर सहित विभाग के विद्यार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन डॉ. सुमित सिंह ने किया।
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