शर्म की दीवारें तोड़ते हुए महिलाओं के स्वास्थ्य का सम्मान
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जिव्हाळा संस्था और पिंकीश फाउंडेशन की प्रेरणादायी पहल
मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य प्रबंधन पर जनजागरूकता; सैकड़ों महिलाओं को इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड का वितरण
नागपुर/उमरखेड। ‘शर्म नहीं, चुप्पी नहीं, आज संवाद चाहिए; मासिक धर्म है स्वास्थ्य का प्रतीक, यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है’। इस प्रभावशाली संदेश के साथ पळशी गांव में महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की गूंज सुनाई दी। “मासिक धर्म कोई उपेक्षित विषय नहीं, बल्कि सम्मान के साथ स्वीकार की जाने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। मासिक धर्म पर चुप्पी ही कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनती है। महिलाओं को बिना झिझक अपने स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए,” ऐसा स्पष्ट प्रतिपादन जिव्हाळा संस्था के संस्थापक अतुल लताताई राम मादावार ने किया।
जिव्हाळा संस्था और पिंकीश फाउंडेशन, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में बाढ़ प्रभावित पळशी गांव में मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य प्रबंधन विषय पर जनजागरूकता कार्यक्रम तथा इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं को निःशुल्क सेनेटरी पैड वितरित किए गए। मार्गदर्शन करते हुए अतुल लताताई राम मादावार ने बताया कि जिव्हाळा संस्था पिछले बारह वर्षों से यवतमाल, हिंगोली, नांदेड और गडचिरोली जिलों में मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर निरंतर जनजागरूकता कर रही है।
संस्था ने हजारों महिलाओं और किशोरियों को विस्तृत मार्गदर्शन के साथ सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा, “अज्ञान, अंधविश्वास और सामाजिक बंधनों के कारण आज भी अनेक महिलाएं मासिक धर्म के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती हैं। उचित स्वच्छता, समय पर पैड बदलना और उपयोग किए गए पैड का सुरक्षित निपटान—ये सरल आदतें महिलाओं को गंभीर बीमारियों से बचा सकती हैं।”
कार्यक्रम में मासिक धर्म के दौरान आवश्यक सावधानियां, स्वच्छता का वैज्ञानिक महत्व, उपयोग किए गए सेनेटरी पैड का सुरक्षित निपटान तथा पर्यावरण अनुकूल इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड के लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, यह बात उपस्थितों को समझाई गई।
इस पहल से महिलाओं के बीच सकारात्मक और खुला संवाद शुरू हुआ। कई महिलाओं ने पहली बार मासिक धर्म से जुड़े अपने प्रश्न निर्भीक होकर सामने रखे। उपस्थित महिलाओं ने कार्यक्रम से आत्मविश्वास में वृद्धि होने की भावना व्यक्त की।
इस सफल आयोजन के लिए जिव्हाळा संस्था के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक चंद्रकांत खेवलकर, रवी रामधनी, राजेंद्र सुनेवाड, राजकुमार मुळावकर सहित पिंकीश फाउंडेशन, दिल्ली का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। जिव्हाळा संस्था की ओर से बताया गया कि समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे।

