एक दिवसीय कार्यशाला में 'उर्दू साहित्य और नाट्य लेखन' का आयोजन किया
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नागपुर। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर उर्दू विभाग में सोमवार दिनांक 12 जनवरी सुबह 11:30 बजे एक दिवसीय कार्यशाला 'उर्दू साहित्य और नाट्य लेखन' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ विश्वविद्यालय गीत से हुआ। उर्दू विभाग प्रमुख डॉ. संतोष गिरहे ने अपने स्वगत उद्बोधन मे नाट्य लेखन पर बात की। उन्होंने भारत मुनी के नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक कालतक के नाट्य प्रवास को बताते हुए नाट्य साहित्य के विभिन्न् भेदो की जनकारी दी। साथ ही नाट्य साहित्य की विशेषता और नाट्य अभिनय के माध्यम से तैयार हुए अनेक फिल्म कलाकारों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की।
महाराष्ट्र में मराठी नाटक की समरुद्ध परम्परा पर प्रकाश डालते हुए उसकी लोकप्रियता की बात कहीं। डॉ श्यामराव कोरेटी(प्रभारी अधिष्ठाता, मानविकी संकाय) ने अपने अध्यक्षीय उदाबोधन में भारतीय परिवेश में नाट्य साहित्य का महत्व बताते हुए साहित्य रुचि की के लिए विध्यर्थियो मे अभिनय कला का महत्व रेखांकित किया। साथ ही साथ नाट्य लेखन को साहित्य का विशेष अंग मानते हुए उसके अनेक पहलुओं की बात की। विशेष अतिथि वक्ता श्री बाबर शरीफ (साहित्यकार एवं सहायक प्राध्यापक शासकीय कला व अभिकल्प महाविद्यालय, नागपुर) ने स्क्रीन प्ले की विशेषताएं बताई और नाट्य कला को परिभाषित किया।
अरस्तू और प्लेटो का हवाला देकर नाट्य साहित्य का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही नाट्यरस का विश्लेषण करते हुए भरतमुनि के नाट्यशास्त्र पर भी बात की। उन्होने आगा हसन अमानत को उर्दू का महत्वपूर्ण नाटककार बताया। प्रमुख अतिथि वकील नजीब (साहित्यकार, नागपुर) ने नाट्य की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को नाट्य लेखन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होने नाटक के सिद्धांत और तकनीक पर बात की। सोशल मीडिया के माध्यम से उर्दू नाट्य साहित्य को किस प्रकार प्रगति प्रदान की जा सकती है। किस प्रकार पारसी रंगमंचों ने नाटक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है आदि की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ समीर कबीर ने किया।
डॉ. असमत कौसर ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला मे प्राध्यापक डॉ शाइस्ता तबस्सुम, डॉ अस्मत कौसर, डॉ सबीहा खुर्शीद, डॉ सुमैया अफशा, डॉ तरन्नुम नियाज, ग़ुल्फ़ेशाँ अंजुम, डॉ महेर यासमीन तथा विभाग के सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।

