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भगवान श्री राम के आचरण को दैनिक जीवन में उतारिए : पं. कृष्ण कुमार शास्त्री


नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन में 'चौपाल' उपक्रम के अंतर्गत 'वर्तमान जीवन शैली में घटती मानवीय मर्यादाएं' इस शीर्षक पर परिचर्चा का आयोजन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में संयोजक विजय तिवारी तथा सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे इनके नेतृत्व चर्चा सत्र का किया गया।

इस कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आशीष शर्मा, छत्रपालक, श्री श्री रविशंकर वैदिक शिक्षा आश्रम, फैक्ट्री नागपुर, इसी प्रकार श्रीमती आरती पांडे, विश्व हिंदू परिषद, पश्चिम नागपुर, महिला सह प्रमुख, ज्योतिष आचार्य व शिक्षिका, पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री, धर्माचार्य, विद्या वाचस्पति, साहित्य रत्न, डॉ श्री बच्चू पांडे, अध्यक्ष हिंदी भाषिया ब्राह्मण विकास संघ पूर्व प्राध्यापक, जीएस कॉमर्स कॉलेज, नागपुर व समाज सेवक, इसी प्रकार श्रीमती डॉ. प्रेमलता तिवारी पूर्व मुख्य अध्यापिका भोला हाई स्कूल व अध्यक्ष नारायण शक्ति फाउंडेशन, नागपुर उपस्थित थे।

चौपाल की परंपरा के अनुसार सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम के शुरुआत की। रमेश  मौदेकर ने वर्तमान परिवेश में माता- पिता की जिम्मेदारीया व समाज की व्यवस्था व उसमें छिपे हुए दोष बताते हुए उन्होंने बहुत ही कुशल और व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

लक्ष्मीनारायण केसकर ने पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री का संपूर्ण जीवन परिचय बताते हुए,  उन्होंने पड़ोस व समाज से आए अनुभव, वर्तमान में युवा माता- पीताओं की दैनिक व्यवहारिक क्रिया कलाप व असंस्कारिक जीवन शैली व उसके दुष्परिणाम बताते हुए उन्होंने छोटे- छोटे प्रयासों से बड़ी सफलता के राज बताएं।
धीरज दुबे ने चौपाल द्वारा चलाए जा रहे उपक्रम की प्रशंसा करते हुए उन्होंने वर्तमान जीवन शैली में पनप रहे पाश्चात्य सभ्यता पर चोट किया व पारिवारिक संस्कृति छोटे- छोटे दैनिक व्यवहार के बारे में बताते हुए बदलाव के अनेक  उपाय बताएं।

श्रीमती आरती पांडे ने अपने ज्योतिष व्यवसाय के माध्यम से आए हुए अनुभव के बारे में लोगों के विचार कैसे होते हैं, उन्होंने बताया की किस प्रकार जिज्ञासु धन, वैभव, शिक्षा, प्रेम व विवाह इन सब विषयों पर भविष्य जानना चाहते हैं। परंतु जीवन के सबसे महत्वपूर्ण 'सुख भाव' के बारे में कोई जानना नहीं चाहता। इस बात पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्ति किया। इसी प्रकार अध्यापन जीवन में आए हुए अनुभव के अनुसार उन्होंने यह भी बताया की डिजिटल आधुनिक युग में यदि संस्कार में आकर्षण हो तो, आज भी युवा उसे अपनाने को तैयार होते हैं, तथा  छोटे बच्चों को उनके हमजोली के साथ खेलने व समय बीतने अवसर दिया जाए तो उनकी प्रतिभा में निखार आता है, इस बार पर उन्हें जोर दिया।

पंडित कृष्ण कुमार शास्त्री जी ने किस प्रकार समाज के आती पीड़ित, प्रताड़ित व शिक्षा से वंचित बच्चों में संस्कार व शिक्षा के प्रति आकर्षण पैदा कर उन्हें गलत मार्ग में जाने से रोक कर संस्कृत व  ज्ञान से शिक्षित कर वर्तमान युग में स्थापित किया। इसी प्रकार भगवान श्री राम के जीवन व आचरण के अनेक प्रसंग पर बात की। उन्होंने धर्म प्रचार, संस्कृत व शिक्षा के लिए अनेक प्रयास व प्रयोग किए और आज भी वे निरंतर करते आ रहे हैं। इन सब विषय पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की।

आशीष शर्मा ने डिजिटल संसाधनों ने घिरे होने के बाद भी किस प्रकार दैनिक जीवन में हमारे समय की बचत होती है व उसका सदुपयोग कैसे किया जाए, इसी प्रकार वर्तमान जीवन शैली में संवेदना का महत्व, उसका सामाजिक व्यवहार में  किस प्रकार अनुभव किया जाए, इसका उन्होंने बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत कर अनेक उदाहरण साथ बहुत ही अच्छा संवाद स्थापित किया।

डॉ प्रेमलता तिवारी ने उनके अध्यापन व सामाजिक जीवन में उन्होंने किस प्रकार से समाज के प्रताड़ित हुआ पिछड़े हुए बच्चों में संस्कार पैदा किया व एक अच्छे नागरिक होने के उदाहरण प्रस्तुत किया, इस पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। 
डॉ. बच्चू पांडे ने उनके जीवन के कठिन परिस्थिति में विजय तिवारी ने किस प्रकार उनका सहयोग किया इस बारे में बताते हुए उन्होंने अपने अध्यापन जीवन में आए हुए अनुभवों को साझा किया वह आज भी माता- पीताओं को कैसा आचरण करना चाहिए, कैसे संस्कार बच्चों को देना चाहिए इस पर उन्होंने बहुत ही अच्छे सुझाव दिए। 
जय भगवान शर्मा ने चौपाल के द्वारा चलाए जा रहे इस उपक्रम की प्रशंसा करते हुए यह बताया कि इसकी उपयोगिता व सफलता सभी सार्थक होगी जब ऐसे समाज के अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजनों में युवाओं को आमंत्रित किया जाए, प्रोत्साहित किया जाए व उन्हें शामिल किया जाए।
विजय तिवारी ने आज की चर्चा के अनेक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए विषय के गंभीरता व उनके निदान के बारे में बहुत ही सुंदर सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. बच्चू पांडे ने चर्चा की सफलता के साथ सभी अतिथियों का व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे ने बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया। 
कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्व श्रीमती हेमलता मिश्र मानवीय, किशोरी गणवीर, प्रीति तिवारी, तुलसी तिवारी, सर्वश्री पद्मदेव दुबे, लक्ष्मीनारायण केसकर, रमेश मौदेकर, धीरज दुबे, लक्ष्मीप्रसाद वघारे, संदीप शर्मा, जय भगवान शर्मा, डॉक्टर (कवि) कृष्ण कुमार द्विवेदी, श्याम केसर, आनंद मूल, गणेश ठाकुर, विजय वाघमारे इन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया
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