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मोबाइल इंटरनेट से बच्चों का अधिक झुकाव पर अभिनंदन मंच द्वारा परिचर्चा


पुस्तक पठन संस्कृति के प्रति रूचि जगाने पर सुंदर प्रस्तुति रही

नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच (ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान) के अंतर्गत कार्यक्रम 'मोबाइल इंटरनेट से बच्चों का अधिक झुकाव होने के कारण पुस्तक पठन संस्कृति के प्रति रूचि जगाना' इस विषय पर परिचर्चा की  सुंदर प्रस्तुति रही।यह आयोजन हिंदी मोर भवन रानी झांसी चौक में किया गया। प्रमुख अतिथि महेश शर्मा भा.राजदेरकर वैद्यकीय प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, नागपुर की मंच पर उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत, हेमंत पांडेय, डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह से किया। प्रमुख अथिति  महेश राजदेरकर ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के आयोजकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। आज समय के अनुसार बदलाव लाना समय की मांग है। 

टेक्नोलॉजी हमारे ऊपर हॉबी है बच्चों को लाइब्रेरी से लाभ के बारे में अवगत कराना चाहिए। मोबाइल पर सर्वे  करने के बाद यह ज्ञात हुआ कि बच्चों से मोबाइल से दूरी बनाना। इसके लिए घर के माता- पिता दादा -दादी और शिक्षक के द्वारा सुधार किया जा सकता हैं। बच्चों को रामायण महाभारत और शिक्षा देनी वाली किताबों से उनका परिचय कराना। बचपन में पंचतंत्र, चाचा चौधरी, चंदा मामा ,कादम्बिनी जैसे पुस्तके के प्रति लगाव कराना। सर्व प्रथम कार्यक्रम की शुरूआत हेमंत पांडेय ने परिवार की जिम्मेदारी बनती है अधिक मोबाइल का इस्तेमाल की आदत  छुड़ाना। मोबाइल से फायदे के साथ नुकसान भी होता है। माया शर्मा ने कहा मोबाइल अधिक इस्तेमाल से उनका शारीरिक और बौद्धिक विकास रुक जाता है। बच्चे चिड़चिड़े हो जाते है। बच्चों को महापुरुषों की किताबों को पढ़ने के  प्रति रूचि जगाना। 

लक्ष्मीकांत कोठारी ने कहा पत्नी पर पारिवारिक जिम्मेदारी का अधिक भार आ जाने के कारण बच्चे जिद्दी होते जा रहे है। डॉ. बालकृष्ण महाजन ने कहा एकल परिवार  में बच्चों का सहारा मोबाइल हो गया है। बच्चों को शिबीर में भेजना चाहिए। मदन गोपाल वाजपेई ने कहा कि हम मोबाइल से जितने करीब हो गए उतने ही हम दूर हो गए। मोबाइल के द्वारा हॉस्पिटल्स सेअपॉइंटमेंट मिल जाता है । मोबाइल पर कई मुद्दों पर उसके लाभ से अवगत कराया। जगत वाचपेई ने अपने वक्तव्य में नई टेक्नोलॉजी पर विशेष रूप विचार व्यक्त किए। चाइना टेक्नालॉजी में  सबसे आगे है । अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा शिक्षित करवा रहा है। प्राचीन सभ्यता को पश्चिमी देशों में  सिखाया जा रहा है। साथ में पश्चिमी देशों में बच्चों को धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। कार्यक्रम के संयोजक  व संचालन डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में , अंबरीश दुबे, पी. गंगाधर पाटणकर, बलदेव जुनेजा, ओमप्रकाश कहाते, नंदिनी सुदामल्ला, पद्मदेव दुबे, रमेश मौदेकर, राजीव गायकवाड, अनिता गायकवाड़, इंदु शर्मा, सुनीता गुप्ता, दिनेश बागड़ी, यशवंत पाटिल की उपस्थिति रही।आभार प्रदर्शन का दायित्व हेमंत पांडेय ने किया।
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