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गिरता भूजल स्तर बढ़ा रहा चिंता, कुओं के पुनर्जीवन की जरूरत; नीरी रिपोर्ट ने किया आगाह

नागपुर। नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) की एनवायरनमेंट स्टेटस रिपोर्ट (ESR) 2024-25 में शहर में गिरते भूजल स्तर और बढ़ते प्रदूषण को लेकर गंभीर स्थिति उजागर हुई है। नागपुर महानगर पालिका के लिए तैयार इस रिपोर्ट को 22 अप्रैल को होने वाली आमसभा में प्रस्तुत किया जाना है।

रिपोर्ट के अनुसार नागपुर में भूजल स्तर 0.36 मीटर से 3.83 मीटर के बीच दर्ज किया गया है, वहीं कुछ क्षेत्रों में हर वर्ष लगभग 0.40 मीटर की गिरावट सामने आई है। कई स्थानों पर भूजल में बैक्टीरियल प्रदूषण ‘टू न्यूमेरस टू काउंट’ स्तर पर पाया गया है, जबकि टीडीएस 323 mg/L से लेकर 2200 mg/L तक दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि शहर में भूजल की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

इस स्थिति के बीच पारंपरिक जल स्रोतों, विशेषकर कुओं के पुनर्जीवन की आवश्यकता फिर से सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंद पड़े सार्वजनिक कुओं की सफाई कर उन्हें वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचना के रूप में विकसित किया जाए, तो गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।

शहर में कुओं की सफाई और संरक्षण को लेकर पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2021 से इस विषय को विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है, जिससे अब यह मुद्दा नीति निर्माण के केंद्र में आने लगा है। नीरी की रिपोर्ट ने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूती प्रदान की है।

रिपोर्ट में वायु और ध्वनि प्रदूषण को भी गंभीर समस्या बताया गया है। शहर में पीएम2.5 और पीएम10 कणों का स्तर लगातार निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया है, जबकि कई क्षेत्रों में ध्वनि स्तर 70 डेसिबल से ऊपर दर्ज किया गया है। साइलेंस जोन में भी नियमों का व्यापक उल्लंघन सामने आया है।

जल गुणवत्ता के मामले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शहर की नदियों का पानी पीने, स्नान और सिंचाई के लिए अनुपयुक्त पाया गया है। इसका मुख्य कारण बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह, कचरे का अनुचित निस्तारण और फीकल बैक्टीरिया की मौजूदगी है।

नीरी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि नागपुर में पर्यावरणीय समस्याएं अब व्यापक और दीर्घकालीन रूप ले चुकी हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी जल नीति में कुओं के पुनर्जीवन को शामिल करते हुए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि भूजल स्तर को स्थिर किया जा सके और भविष्य के जल संकट से निपटा जा सके।

नागपुर की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अन्य शहरों में भी हालात चिंताजनक हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाए।


- डॉ. प्रवीण डबली

स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार | जल कार्यकर्ता | जल योद्धा पुरस्कार प्राप्त। प्रशिक्षक | योग थेरेपिस्ट | हेल्थ मोटिवेशनल स्पीकर | नर्व स्टीमूलेशन थेरेपिस्ट। 

ईमेल: pravindabli@gmail.com

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