प्यार का एहसास..
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घर से बेघर हो गया हूं मैं।
दर्द कुछ ऐसा मिला
कि राहे बदर हो गया हूं मैं।
तेरे पायल की खनक का एहसास रहता है,
पतझड़ के बाद सावन आने का इंतज़ार रहता है।
चांद सितारों की रौशनी को देखने के बाद,
होश खो बैठता हूं जब आती है तेरी याद।
सांसों की हर धड़कन में बसी है तू,
जिंदगी के साथ मानो चल रही है तू।
अंधेरी रात हो या हो भयंकर तुफ़ान
आश की लौ को *मिश्र* बुझने न देना
यही ही रह गया है मेरा काम।।
दूर होकर भी तुझसे दूर जा न सका
दिल के रिश्ते कमज़ोर हों ऐसा कर न सका
कोशीश बहुत की कि तुझको भूल जाऊं
लेकिन सपनों में तुझको भुला न सका।
- रामनारायण मिश्र
नागपुर, महाराष्ट्र
