हिंगणा निर्वाचन क्षेत्र की जनता, किसानों और छात्रों के ज्वलंत मुद्दों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (श.प.) का तहसीलदारों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन
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कठिन शर्तों के कारण कर्जमाफी विफल होने का आरोप; ईंधन की कीमतों में वृद्धि, बिजली दरों में बढ़ोतरी, खून के रिश्तों में जमीन के बंटवारे पर शुल्क रद्द करने और ओबीसी की जातिवार जनगणना की पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग की आक्रामक मांग
नागपुर। हिंगना विधानसभा क्षेत्र की आम जनता, किसानों, खेत मजदूरों और छात्रों की अत्यंत गंभीर और लंबित समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग के नेतृत्व में हिंगणा स्थित तहसील कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने माननीय तहसीलदार के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विभिन्न मांगों का एक सार्वजनिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में राज्य सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की गई है और मांगें पूरी न होने पर हिंगणा निर्वाचन क्षेत्र में तीव्र जनआंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए सरकार और प्रशासन जिम्मेदार होंगे।
कर्जमाफी योजना केवल छलावा और नियमों की जटिलता
ज्ञापन में किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सरकार ने सातबारा (भूमि अभिलेख) कोरा करने का वादा किया था, लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि हाल ही में घोषित 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान कर्जमाफी योजना' कठिन नियमों और शर्तों के कारण पूरी तरह विफल रही है। दो लाख रुपये की सीमा और अन्य कड़े प्रतिबंधों के कारण लाखों किसान इस योजना से वंचित रह गए हैं। हिंगणा तालुका की जमीनी हकीकत को सामने रखते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि तालुका के १३५५ बकायादार किसान सदस्यों में से १०९१ किसानों ने कर्जमाफी के लिए पंजीकरण कराया था। हालांकि, सरकार के जटिल नियमों के कारण केवल ८६ किसान ही पात्र पाए गए, जबकि १००५ किसानों को अपात्र घोषित कर दिया गया। यह किसानों का क्रूर मजाक है और मांग की गई है कि सरकार तुरंत शर्तों में ढील देकर बिना शर्त (सरसकट) कर्जमाफी करे।
बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतें और बिजली संकट
इसके साथ ही, पिछले एक महीने में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में हुई भारी वृद्धि के कारण आम जनता का बजट बिगड़ गया है, जिसे देखते हुए महंगाई पर तुरंत नियंत्रण पाने की मांग की गई है। नागपुर में पेट्रोल ११२ रुपये और डीजल ९७ रुपये के पार जाने से परिवहन लागत बढ़ गई है और आवश्यक वस्तुएं महंगी हो गई हैं। ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि यदि सरकार ईंधन पर लगने वाले 'अधिभार' (सरचार्ज) और 'मूल्य संवर्धित कर' (वैट) को कम कर दे, तो जनता को सीधे २५ से ३५ रुपये तक की वित्तीय राहत मिल सकती है। बिजली दरों में अत्यधिक वृद्धि और खेती के लिए रात में केवल ७ से ८ घंटे मिलने वाली बिजली आपूर्ति पर भी कड़ा एतराज जताया गया है। जंगली जानवरों के खतरे के बीच रात में फसलों को पानी देना पड़ता है, और ट्रांसफार्मर जलने व अघोषित बिजली कटौती के कारण फसलें सूख रही हैं। किसानों के बिजली कनेक्शन काटने का सिलसिला रोकने, खेती के लिए दिन में लगातार १२ घंटे बिजली देने और उपभोक्ताओं पर जबरन स्मार्ट मीटर न थोपकर उनकी मांग के अनुसार ही निर्णय लेने की मांग की गई है।
आदिवासियों के अधिकार और जमीन पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी का विरोध
खरीफ सीजन के मद्देनजर रासायनिक उर्वरकों और कृषि दवाओं की कीमतों में १० से २५ प्रतिशत की वृद्धि तथा बाजार में कृत्रिम कमी व जमाखोरी पर सरकार से सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। आदिवासी भाइयों की वन भूमि के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि २०१६ के एक परिपत्र (सर्कुलर) के जरिए सातबारा से आदिवासियों के नाम हटाकर 'महाराष्ट्र सरकार' नाम दर्ज कर दिया गया है। इसके कारण आदिवासी किसान बैंकों के फसल ऋण और सरकारी योजनाओं से वंचित रह गए हैं। इस किसान विरोधी फैसले को रद्द कर आदिवासियों के नाम सातबारा पर बहाल करने की मांग की गई है। साथ ही, २००७-०९ के निर्णय के अनुसार खून के रिश्तों या भाईचारे में जमीन का बंटवारा करते समय केवल ५०० रुपये के स्टांप शुल्क पर होने वाली प्रक्रिया को बदलकर वर्तमान सरकार द्वारा लगाए गए '१ प्रतिशत' के दमनकारी पंजीकरण शुल्क को तुरंत रद्द करने की मांग पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग ने पुरजोर ढंग से उठाई है, क्योंकि इस शुल्क के कारण गरीब किसानों पर लाखों रुपये का बोझ पड़ रहा है और पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र के घोटाले और स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा क्षेत्र में ६६४ फर्जी शिक्षकों की भर्ती घोटाला और 'नीट' (NEET) परीक्षा में पेपर लीक व धांधली के कारण देश और राज्य के २३ lakh छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब गया है। ११वीं की ऑनलाइन केंद्रीय प्रवेश प्रक्रिया के जटिल नियमों के कारण इंटरनेट की कमी वाले ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के लिए शहरों में प्रवेश पाना मुश्किल हो गया है, इसलिए इस प्रक्रिया में ग्रामीण छात्रों को विशेष छूट देने की मांग की गई है। बेरोजगारी की गंभीर समस्या को रेखांकित करते हुए ध्यान आकर्षित किया गया कि हिंगणा निर्वाचन क्षेत्र में दो बड़े औद्योगिक क्षेत्र (एमआईडीसी) होने के बावजूद स्थानीय शिक्षित युवाओं की अनदेखी कर बाहरी श्रमिकों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे युवा पीढ़ी हताशा में अपराध की ओर मुड़ रही है, इसलिए स्थानीय उद्योगों में ८० प्रतिशत रोजगार के नियम को कड़ाई से लागू किया जाए और सभी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए।
ओबीसी की जातिवार जनगणना की पुरजोर मांग
अंत में, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार आगामी जनगणना में 'ओबीसी के लिए एक स्वतंत्र कॉलम' शामिल करे, इस मांग को राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) ने अपना खुला समर्थन दिया है। ज्ञापन में पार्टी की ओर से आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा गया है कि जब तक जातिवार जनगणना नहीं होती, तब तक ओबीसी का आरक्षण बचाना मुश्किल है, इसलिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार से तुरंत इसकी सिफारिश करनी चाहिए।
आंदोलन में शामिल प्रमुख नेता और पदाधिकारी
इस अवसर पर पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग के साथ कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के अध्यक्ष बबनराव आव्हाळे, राष्ट्रवादी कांग्रेस (श.प.) के तालुका अध्यक्ष योगेश सातपुते, पूर्व जिला परिषद सदस्य दिनेश बंग, पार्षद सुरेश कालबांडे, डिगडोह नगर पंचायत की नेता मनाली राजपूत, वानाडोंगरी नगर पंचायत के नेता अनूप डाखले, डिगडोह नगर पंचायत के नेता संदीप नेहारे, कृषि सेल के तालुका अध्यक्ष हनुमंत दुधबले, पार्षद श्याम फलके, पूर्व पंचायत समिति सदस्य सुनील बोंदाड़े, युवा सेल नागपुर ग्रामीण तालुका अध्यक्ष रोशन खाड़े, मुकेश ढोमणे, डिगडोह शहर अध्यक्ष उमेश राजपूत, वानाडोंगरी शहर अध्यक्ष हरिभाऊ रसाल, प्रमोद बंग, वाहिद भाई खान, श्याम गोमासे, नरेश नरड, विकास गणवीर, रमाशंकर गुप्ता, प्रवीण सातपुते, विलास वाघ, विट्ठल मणियार, सरला लोखंडे, पार्षद भारत मेश्राम, विट्ठल हुलके, रामकिशोर महल्ले, विष्णु बाणाइत, मंगेश भांगे, पंकज सिंह, मिलिंद काचोरे, लोकमान छपेरे, महादेव कंगाली, राजेंद्र राउत, मुरलीधर जीवनकर, सुनील हांडे, अर्जुन गवणे, योगेश शेंदरे, किशोर पाटिल, विजय गोलाईत, गजानन मोहिते, प्रेम सावरकर, रौनक खराबे, सचिन येलूरे, श्रीराम उमाटे, निखिल उमरेडकर, अमेश बोदीले, विजय गिरडकर, अशोक बागड़े, सुरेंद्र भारद्वाज, गणेश शेंदरे, शैलेश नागपुरे, शैलेश रॉय, प्रेमलाल भलावी, प्रभुदयाल बिसेन, भूषण आगरकर, संतोष गव्हाळे, देवरावजी मसराम, संजय नवघरे, दीपाली कोहाड, सुनीता नागपुरे, मंदा इटनकर, प्रेमलाल भलावी, शशांक टिपले, निच्छल खंगार, अशोक वैद्य, दयाराम चरडे, प्रबुद्ध गायकवाड़ सहित राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के कई प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और हिंगणा निर्वाचन क्षेत्र के किसान व नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
