पानी, कृषि, उद्योग, जीवन के लिए जरूरी : एस एन विनोद
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नागपुर। 'जल और जीवन' विषय पर नागपुर वैचारिक मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, नागपुर के सभा कक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भालचंद्र जैन की अध्यक्षता में हुआ। जहां उन्होंने कहा यह विषय सम सामायिक है। क्योंकि जल का पर्यायवाची शब्द ही जीवन है उन्होंने आगे चार्वाक दर्शन और भारत में प्रचारित धर्म में जल के महत्व की परंपराओं को उद्घृत कर जल के संरक्षण पर जोर दिया। शैक्षणिक स्तर पर इस विषय पर पी. एच. डी. की जरूरत है।
वरिष्ठ संपादक, पत्रकार एस. एन. विनोद का मत था कि मीडिया में पानी के लिए मीलों चलते हुए व्यक्तियों के दृश्य देखकर मन आज भी खिन्न हो जाता है। पानी का नियोजन और इसके इस्तेमाल पर जागरुकता की जरूरत है। जिसे सरकारी अभियान बनाया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्र विकास में कृषि, उद्योग और जीवन के लिए जल एक जरूरी तत्व है।
व्यंग्य कवि डॉ नीरज व्यास की चिंता का विषय प्रदूषण और बदलते मानसून की बिगड़ती स्थिति थी।
वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अनिल त्रिपाठी का कथन था जल उत्पन्न नहीं कर सकते तो पानी का सदुपयोग निश्चित ही किया जाना चाहिए।
कवयित्री माधुरी राउलकर ने कविता के माध्यम से पानी के संरक्षण की बात उठाई।
वरिष्ठ पत्रकार लेखिका डॉ. पूर्णिमा पाटिल ने कहा जल और जीवन एक गंभीर विषय है। मानव देह में 70% पानी होता है, इसके साथ उन्होंने राजस्थान में हरे भरे गांव के बदलते स्वरूप तथा डॉ. राजेंद्र सिंह के जल संवर्धन की विधि समझा, साथ ही विदेशों में और इंदौर के इको घर की विधि का वर्णन किया और वर्षा के पानी का सदुपयोग समझाया ।
अनुवादक व वरिष्ठ लेखिका नेहा भंडारकर ने भूजल की असमानता, दूषित पानी की समस्या के साथ रन हार्वे सिस्टम की आवश्यकता और सरकारी योजनाओं का लेखा-जोखा समझाया।
कवयित्री नीलिमा शुकला ने घरों परिवारों में जल नियोजन की आवश्यकता पर जागरूकता की जरूरत पर बल दिया।
मराठी लेखक डॉ. बलवंत भोयर ने मकरंद अनासपूरे, नाना पाटेकर के कार्यों का उल्लेख कर सामूहिक जल संवर्धन की व्यवस्था पर जल साहित्य परिषद और पर्यावरण नियंत्रण समिति को संस्था ने निर्देश देने चाहिए ,ऐसा सुझाव दिया।
पत्रकार, संपादक कृष्ण नागपाल नेकहा हम आधुनिकता के चक्कर में पानी के लिए अधिक खर्च करने लगे हैं और साथ ही पानी का दुरुपयोग भी कर रहे हैं । जिसके नियोजन की व्यवस्था बहुत जरूरी है।
वरिष्ठ लेखिका धृति बेडेकर का कथन था हमें सकारात्मक सोच के साथ सरकारी योजनाओं से जुड़ना चाहिए और खुले शौच, अंधश्रद्धा की आड़ में मेंढक, मेंढकी के विवाह के औचित्य पर भी उन्होंने प्रहार किया। साथ ही टैंकर माफिया का स्वयं के लाभ के लिए पानी के दुरुपयोग पर प्रश्न खड़े किए।
संपादक कथाकार नरेंद्र परिहार ने समुद्र के पानी को और निस्तार के पानी की रीसाइकलिंग की आवश्यकता के साथ, नदी जोड़ो परिकल्पना के तकनीकी पहलू देख बांध से नहरों के जल प्रवाह पर जोर दिया। आज रेगिस्तान में नहर और वर्षा के पानी की संयोजन की तकनीकी भले खर्चीली है पर हमारी भविष्य की जरूरत है।
वरिष्ठ लेखिका और अनुवादक इंदिरा किसलय ने विस्तृत सरकारी लेखा जोखा दे विवरण दिया।कैसे गन्ने, शक्कर, चमड़ा उद्योग, थर्मल पावर स्टेशन पर पानी का बहुत खर्च होता है, उसके लिए जलविद्युत पावर के साथ, विंड पावर के इस्तेमाल, पानी के निकासी पर रीसाइकलिंग प्लांट की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नाना पाटेकर और आमिर खान के पानी संवर्धन हेतु किए गए कार्य और उनके एन. जी. ओ. की भूरी-भूरी प्रशंसा की और ऐसे सहयोगों के लिए हमें आगे आना चाहिए व जन चेतना लानी चाहिए।
रेलवे के उप प्रबंधक पारसनाथ शर्मा ने पानी के वितरण प्रणाली से होने वाले लीकेज के दुरुपयोग पर प्रश्न उठाए और बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए पानी के नियोजन पर सरकारी प्रणाली को सुरक्षित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजेंद्र पटोरिया ने अपनी प्रस्तावना में तालाब, कुएं के साथ सूखती नदियों और भू जल के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त कर पानी के संरक्षण और नियोजन पर बल दिया।
आभार नागपुर वैचारिक मंच के सहसंयोजक नरेंद्र परिहार ने माना और बताया अगली सभा का विषय है लोकतंत्र पर संकट।
