एक पल के लिए सोचो



एक पल के लिए सोचो,

जरा रुक जाओ ठहर जाओ, 

पलके मूंद लो,

और इक पल के लिए सोच लो,

आज से आप सिर्फ सच बोलोगे 

और सच के सिवा कुछ भी नहीं।


देखो आपकी पूरी ज़िंदगी ही

पुरी तरह से बदल जाएगी

एक पल के लिए सोचो की

सारे लोग ईमानदार हो जाए

सिर्फ सच ही बोले

झूठ से नाता तोड ले 

चोरी करना छोड़ दे

तो सारी दुनिया 

कितनी खुश हो जाएगी?


जरा सोचो नेता गण 

क्या बोलेंगे और 

कितना बोल पाएंगे?

विधानसभा में मौन रहेगा

लोकसभा में स्पीकर भी मौन रहेगा,

क्या होगा क्या कर पाएंगे?


जरा सोचो अदालत में

वकील क्या करेंगे

हो सकता है की 

अदालते बंद ही होके रहेंगी।


डॉक्टर भी क्या बता पाएंगे,

कि असल में आप सेहतमंद है।


तुम सब से हसीन 

सबसे ज्यादा खुबसूरत हो

ऐसे संवाद शायद 

फिर कभी सुनाई नही देंगे

तारीफों का पुल बनने के 

पहले बिखर जायेगा


एक पल के लिए ही 

मिलने वाला 

झूठा ही सही सुख

भी नहीं  मिलेगा

शादियों में बहुत 

गड़बड़ हो सकती है

पहली रात जब पता पड़ेगा की

ये तो पहली है ही नहीं,

अनेकों में की आज की पहली है

तो सारी पहेलियां बुझ जायेंगी।



आपके इर्दगिर्द के 

लोग बदल जायेंगे

उन की आपके बारे के 

सोच बदल जाएंगी

आप के अपने भी 

कितनी देर आपके अपने रहेंगे

कोई दूसरा अकेला हो न हो,

आप यकीनन अकेले हो के रहेंगे

वैसे भी छुटपन से ही

ईमानदारी की सीख दी जाती है

बताते है की

इमानदारी की रोटी की 

बात ही अलग है।

लेकीन जल्दी ही 

समझ में आता हैं

जिंदगी के झमेले में

सिर्फ सच झेलना 

मुश्किल ही नहीं,

असंभव सा है।


इसीलिए शायद

झूठ की झालर ही

जिंदगी में चलती है,

कुछ पलों के लिए ही सही

जिंदगी को चमकाती है।


- राजेन्द्र चांदोरकर (अनिकेत)

   नागपुर, महाराष्ट्र 


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