पौधे लगाने से पहले पानी बचाएं, ऐतिहासिक कुएं-तालाबों को जीवित करें : डॉ. प्रवीण डबली



मनपा आयुक्त को सौंपा ज्ञापन : ‘एक संस्था- एक कुआं/तालाब’ योजना और पेड़ों की देखभाल की जिम्मेदारी तय करने की मांग


नागपुर। शहर में घटते हरित क्षेत्र और बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए जल कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् डॉ. प्रवीण डबली ने मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इतनकर को ज्ञापन सौंपकर जल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए ठोस उपाय करने की मांग की। मनपा के उद्यान विभाग द्वारा आयोजित बैठक में सुझाव देने के बाद उन्होंने यह ज्ञापन प्रस्तुत किया।


डॉ. डबली ने कहा कि नागपुर में हरित क्षेत्र वर्ष 2015 के 21.39 प्रतिशत से घटकर 2025 में मात्र 9.69 प्रतिशत रह गया है। केवल पौधारोपण से समस्या हल नहीं होगी। पौधों को जीवित रखने के लिए भूजल स्तर बढ़ाना और वर्षाजल को जमीन में पहुंचाना जरूरी है।


उन्होंने शहर के ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक कुओं और तालाबों के संरक्षण के साथ ‘एक संस्था–एक कुआं/तालाब’ (Adopt a Water Body) योजना लागू करने का प्रस्ताव दिया। इसके तहत सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों को जलस्रोतों की सफाई, संरक्षण एवं पुनर्जीवन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।


डॉ. डबली ने नई इमारतों और आवासीय योजनाओं में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने, सीमेंट की सड़कों से बहने वाले वर्षाजल को जमीन में पहुंचाने के लिए उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज सिस्टम बनाने तथा प्रत्येक क्षेत्र में पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित नगरसेवक को सौंपने का सुझाव दिया।


बैठक में मनपा आयुक्त ने बताया कि शहर में लगभग 4,000 स्थानों पर सड़क किनारे वाटर हार्वेस्टिंग बिंदु विकसित करने का निर्णय लिया गया है। पांढराबोडी तालाब के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी पारित हुआ है। मनपा द्वारा साफ किए गए लगभग 400 कुओं के पानी का उपयोग पेड़ों और उद्यानों को जीवित रखने के लिए करने की बात भी उन्होंने कही।


डॉ. डबली ने यह भी कहा कि मनपा के अलावा PWD और अन्य एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र वाली सड़कों पर पेड़ों के आसपास कंक्रीटीकरण की समस्या दूर करना आवश्यक है। आयुक्त ने प्रस्तुत सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जलस्रोत जीवित रहेंगे, तभी पेड़ बचेंगे और नागपुर को हरित एवं जलसमृद्ध शहर बनाने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।


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