पूजा में श्रद्धा, तो प्रतिमाओं का अपमान क्यों? : किरण मुंदड़ा



नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी में ‘चौपाल’ उपक्रम के अंतर्गत ‘पूजा में श्रद्धा, तो व्यवहार में प्रतिमाओं का अपमान क्यों’ विषय पर चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में तेजस्विनी मंच की अध्यक्षा श्रीमती किरण विट्ठल कुमार मुंदड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। संयोजक विजय तिवारी और सह-संयोजक हेमंत कुमार पांडे के नेतृत्व में कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र एवं सम्मानचिह्न देकर अभिनंदन किया गया।


चर्चा के दौरान मदनगोपाल बाजपेई ने त्योहारों के बाद देव प्रतिमाओं और पूजन सामग्री के अनुचित निस्तारण पर चिंता जताते हुए जनजागृति के सुझाव दिए। पंडित धीरज दुबे ने भी पूजन सामग्री के प्रति जिम्मेदारी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।


मुख्य अतिथि किरण मुंदड़ा ने कहा कि श्रद्धा केवल पूजा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने गणेश और लक्ष्मी जैसे देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के बजाय उनके प्रतीकात्मक महत्व और उनसे जुड़ी ज्ञान व सदाचार की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।


उन्होंने तेजस्विनी मंच की ‘हम हैं ना, हमें दीजिए!’ पहल की जानकारी देते हुए बताया कि अनुपयोगी धार्मिक प्रतिमाएं, चित्र, ग्रंथ, वस्त्र-आभूषण और अन्य पूजन सामग्री मंच को सौंपी जा सकती है। इसका संकलन केंद्र आनंद टॉकीज के पास शुक्रवार और शनिवार को दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक संचालित होता है। एकत्रित सामग्री का उचित नियोजन कर जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है।


विजय तिवारी ने प्रभावशाली संचालन किया तथा अंत में आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में माया शर्मा, नीरजा ठाकुर, कल्पना मोहता, एड. जगत बाजपेई, निहार शर्मा, सौरभ शुक्ला सहित चौपाल के अनेक सदस्यों और उपस्थित श्रोताओं का योगदान रहा।


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