सूखे के बाद कुओं की याद क्यों? पहले ही हो संरक्षण



सहकारनगर के उपेक्षित सार्वजनिक कुएं की सफाई, पुनर्जीवन और नागपुर शहर व जिले के सभी कुओं के सर्वेक्षण की डॉ. प्रवीण डबली की मांग



नागपुर। सहकारनगर में प्लॉट नंबर 46 के सामने तथा गजानन महाराज मंदिर के ग्राउंड से सटा 60–70 वर्ष पुराना सार्वजनिक कुआं उपेक्षा का शिकार है। कुएं में पानी उपलब्ध होने के बावजूद आसपास झाड़ियां उग आई हैं और सफाई व रखरखाव के अभाव में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।


जल योद्धा एवं जल संरक्षण कार्यकर्ता डॉ. प्रवीण डबली ने नागपुर महानगरपालिका और जिला प्रशासन से कुएं का तत्काल निरीक्षण, सफाई, पानी की गुणवत्ता की जांच तथा पुनर्जीवन कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से नागपुर शहर और जिले के सभी सार्वजनिक, ऐतिहासिक एवं पारंपरिक कुओं का व्यापक सर्वेक्षण कर उनकी स्थिति की सूची सार्वजनिक करने की मांग की। इसमें उपयोग योग्य, गंदगी से भरे, बंद और पाट दिए गए कुओं की जानकारी शामिल होनी चाहिए।


डॉ. डबली ने ‘एक संस्था- एक कुआं’ अभियान शुरू कर स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को कुएं गोद देने तथा सीएसआर (CSR) निधि से उनकी सफाई, वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और नियमित रखरखाव कराने का सुझाव दिया।


उन्होंने कहा कि कुएं प्राकृतिक जलसंपदा और भूजल पुनर्भरण के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। सूखे के बाद कुओं की तलाश करने के बजाय पहले से उनका संरक्षण किया जाए। प्रशासन सभी कुओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर तत्काल कार्रवाई करे।


लोकप्रिय खबरें

श्री नागपुर गुजराती ब्रह्मसमाज में घट स्थापना

डांगे महिला महाविद्यालय में उद्यमिता प्रकोष्ठ का शुभारंभ

विपरीत परिस्थितियों में भी समाजसेवा का संकल्प ही सच्ची सेवा : पद्मश्री डॉ. विकास महात्मे