काव्यसंग्रह ‘खामोश दुआ- सी माँ’ का लोकार्पण
नागपुर। कभी कभी तो खफा सी लगती माँ कुछ कुछ बहती हवा सी लगती माँ। उससे शिकायतें तो खूब करते, मगर खामोश दुआ-सी लगती माँ- प्रस्तुत पंक्तिया है कवयित्री माधुरी राऊलकर की। सुपरिचित कवयित्री माधुरी राऊलकर के 'प्रक्षेप' प्रकाशन से प्रकाशित काव्यसंग्रह 'खामोश दुआ- सी लगती माँ' का लोकार्पण समारोह विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभागृह में सम्पन्न हुआ।
वरिष्ठ साहित्यकार, कवि डॉ. सागर खादीवाला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुये इस लोकार्पण कार्यक्रम के विशेष अतिथि थे प्रसिद्ध मनोरोग के तज्ञ डॉ. सुधीर भावे और प्रमुख अतिथि थे मध्यभारत के किडनी रोग तज्ञ डॉ. शिवनारायण आचार्य कार्यक्रम की शुरूआत मीरा जोगलेकर की सरस्वती वंदना से हुई। इनके हाथों लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस पुस्तक में माँ के बारे में लिखे 300 शेर समाविष्ट हैं। माधुरी ने अपना मनोगत व्यक्त करते हुये माँ के बारे में चार पंक्तिया प्रस्तुत की- पल पल जीवन से लड़ी थी माँ जिन्दगी की तरफ बढ़ी थी माँ। जब न रही माँ, अहसास हुआ, सारे रिश्तों से बड़ी थी माँ। अतिथियों द्वारा माधुरी का शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर सत्कार किया गया। डॉ. सुधीर भावे ने कहा, एक पूरी किताब माँ को समर्पित होकर लिखना कोई आसान काम नहीं है। यह काम उन्होंने बड़ी तन्मयता और सुंदरता से किया है। माँ में दया, करुणा, भक्ति, परोपकार, विश्वास सारे गुण मौजूद होते हैं और इन सारे गुणों को एक पुस्तक में समाविष्ट करना बहुत बड़ी बात है। यह एक अलग और दिल को छूनेवाली किताब है।
डॉ. आचार्य ने कहा 'माँ बच्चों की खातिर हवन होती रही ऐसी पंक्तियों में कितनी बड़ी बात कही माधुरी ने जैसे पूरी किताब का सारांश इस हवन में समाविष्ट हो गया। इतनी अच्छी किताब के लिये मैं उन्हें दिल की गहराइयों से बधाईयाँ देता हूँ। डॉ. सागर खादीवाला ने कहा 'जब से माधुरी ने लिखना शुरू किया तब से इनका लेखन सरलता से भरा पाया। इसलिये इनका लिखना लोगों को अच्छा लगता है। एक ही विषय और वो भी माँ पर लिखना बहुत बड़ी बात है। यह एक अनोखी किताब है। यह उनका 22 वा काव्यसंग्रह है। कार्यक्रम का संचालन अनिल मालोकर और आभार प्रदर्शन पूनम मिश्रा ने किया।
कार्यक्रम में नरेन्द्र परिहार, ओमप्रकाश शिव, सुवास राऊलकर, उमेश शर्मा, आदेश जैन, अविनाश बागड़े, मनीष सोनी, ख्वाजा साजिद, डॉ. बालकृष्ण महाजन, डॉ. राम मुले, डॉ. अशोक डोलस, एस पी सिंह, प्रदीप सावरकर, डॉ. भोला सरवर, जयंत गायकवाड, अशोक संगई, डॉ. आदेला खादीवाला, मधुलिका पांण्डेय, विमलेश सूर्यवंशी, इन्दिरा किसलय, प्रतिमा सावरकर, संध्या संगई, रंजना श्रीवास्तव, पूनम मिश्रा, घृति बेडेकर, मेघा अग्रवाल, देवयानी बैनर्जी, सुजाता दुबे, पूनम तिवारी, नंदिता सोनी, रूबी दास, बुधराजा 'उषा देवलकर, आराधना शर्मा इ. साहित्यकार उपस्थित थे।
