बिटियाँ ससुराल की राह चली



माँ का देखो फटा कलेजा 

पिता की आंखें झर झर बही  

आंगन में अपनी यादों को छोड़ 

बिटियाँ ससुराल की राह चली। 


छोटी सी नन्ही कली। 

दुल्हन बन ससुराल चली। 


 रोज झगड़ती लड़ती सखियां 

कोने में चुप चुप है खड़ी 

देख पड़ोसन काकी भाभी 

के आंखों में आंसू की झड़ी

 बिटियाँ ससुराल की राह चली।

छोटी सी..

दुल्हन बन..


दिनभर लड़की झगड़ती भाई से 

 करती शिकायत खूब खरी

आज भाई की बाहे थामें

 गले मिलकर वह फूट पड़ी

 बिटियाँ ससुराल की राह चली।

छोटी सी..

दुल्हन बन..


 दादा दादी की आंँखों में दिखता भोलापन है

 बिटियाँ के जाने का उनके मन में गम है 

पलकों में आंसू छुपा दे रहे दुआएं 

पोती को डोली में बिठा यादों को गले लगाए। 

बिटियाँ ससुराल की राह चली। 

छोटी सी..

दुल्हन बन..


गाय से खूंटी बंधी हुई थी देख-2 रंभाए रही थी

 चारा कौन खिलाए मुझको 

बिटियाँ तू ससुराल चली 

बिटियाँ ससुराल की राह चली। 

छोटी सी..

दुल्हन बन..


पिंजरे का मिट्ठू भी सहम दुबक कर बैठा 

बिल्ली ने भी दूध न पिया 

कहती बन जाना तू सिया

 साथ पिया का पाकर हमको ना भुलाना

 बिटियाँ ससुराल की राह चली। 

छोटी सी..

दुल्हन बन..।


- मेघा अग्रवाल

   नागपुर, महाराष्ट्र


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