‘देखा इक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए...’
युवावेध की ओर से ‘आरोही’ ने सजाई सुरीले गीतों की शानदार महफिल
नागपुर। युवावेध बहुउद्देशीय संस्था, नागपुर द्वारा संचालित आरोही म्यूजिक अकादमी की ओर से स्व. लता मंगेशकर एवं स्व. स्नेहा तायडे की जयंती के उपलक्ष्य में ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ नामक मधुर हिंदी-मराठी गीतों का कार्यक्रम आनंद नगर मंदिर हॉल, तिरंगा चौक में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. संगीता बानाइत (अध्यक्ष, कला गौरव संस्था), मधुकर दहीकर (उपाध्यक्ष, आनंद ज्येष्ठ नागरिक मंडल) तथा काशीनाथ ठवरे (सचिव) उपस्थित थे। प्रारंभ में अतिथियों के हाथों दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।
इस अवसर पर स्व. स्नेहा तायडे (संस्थापक, आरोही म्यूजिक अकादमी) के कार्यों का लेखा-जोखा डॉ. राजेंद्र जाने (पूर्व प्राचार्य, कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, भिसी) ने अपने प्रास्ताविक वक्तव्य में प्रस्तुत किया। डॉ. संगीता बानाईत ने गीत प्रस्तुत किया, जबकि मधुकर दहीकर ने सभी गायक कलाकारों को शुभकामनाएं दीं। इसके बाद आरोही म्यूजिक अकादमी के सदस्यों ने एक से बढ़कर एक सुरीले गीतों की महफिल सजाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ ‘जय शारदे बागेश्वरी’ शारदा स्तवन से हुआ। इसके पश्चात ‘देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए’, ‘तू कितनी अच्छी है’, ‘एरणीच्या देवा’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’, ‘सच मेरे यार है’, ‘अकेले हैं चले आओ’, ‘दिल दीवाना बिन सजना के माने ना’, ‘जब दीप जले आना’, ‘नाम गुम जाएगा’ और ‘मेरे देश की धरती’ जैसे एक से बढ़कर एक मधुर गीत प्रस्तुत किए गए। गीतों की इन सुरीली प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में बहार ला दी।
इस अवसर पर ग्रीष्मकालीन गायन परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रारंभिक परीक्षा (गायन) में कु. सेजल घुमड़वार, वनिता महंत एवं सुनील महंत ने शानदार सफलता प्राप्त की। प्रवेशिका प्रथम (गायन) में कु. मैथिली मनीष निंबालकर एवं ऋतुजा महाजन अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुईं। वहीं, प्रवेशिका पूर्व (गायन) में कु. रसिका राजेंद्र जाने, सारिका मनीष निंबालकर, योग शिक्षक प्रा. सुनील जयस्वाल एवं डॉ. राजेंद्र जाने ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इन सभी को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता बानाइत ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।
इनका गायन, इनका परिश्रम
कार्यक्रम का कुशल संचालन सौ. अरुणाताई भोंडे एवं एड. अनंत घुलक्षे ने किया। आभार प्रदर्शन अकादमी के संचालक अनुप तायडे ने किया। कार्यक्रम में श्रुति चांदले, शिवेन घुगुसकर, एड. राजू घुगुसकर, डॉ. वैशाली शिरभाते, मालती मडावी, संजय घुमड़वार, पूजाताई जगताप, रंजना मडावी, सुमेध तायडे सहित अन्य 15 सदस्यों ने गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की सफलता के लिए सुभाष धपके, प्रवीण रंभाड़, मीनाक्षी रंभाड़, प्रकाश पाठराबे एवं आरोही तायडे ने अथक परिश्रम किया।

