जीवन के मकड़जाल से कैसे निकलें
फरेबियों के जाल से सतर्क होकर चलना चाहिए,
जो दिन को रात और रात को दिन कहें
ऐसे चापलूसों से बचकर निकलना चाहिए।
जिसके दिखावे के दांत और खाने के हों अलग -अलग,
ऐसे मूर्खो के मुंह नहीं लगना चाहिए।
चमक शीशे के टुकड़े भी चुरा लेते हैं हीरे की,
परख कर ही ऐसे रत्नों को ख़रीदना चाहिए।
बहस करने का दामन जिसका रहता हो खुला ,
उस शख्स से हरदम दूर रहना चाहिए।
बात बात में उग्र होजाता हो पारा जिसका ,
*मिश्र* रोगी के ऐसे निदानों पर काम करना चाहिए ।
जब कोई इंसा आपकी शराफ़त का ग़लत अर्थ निकालने लगे,
आपकी मौजूदगी बर्दाश्त नहीं है उसे तब ये समझ जाना चाहिए।
- रामनारायण मिश्र
नागपुर, महाराष्ट्र
