सशक्त स्त्री ही सशक्त समाज की आधारशिला : प्रो. भारती गोरे
नागपुर। भारत में नारी का स्थान सर्वोपरि है क्योंकि वह शक्ति स्वरूपा है। शक्ति ही सृष्टि का निर्माण करती है। नारी सृजन करती है, नव जीवन देती है यह उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। वह मातृस्वरूप है। इसलिए अति प्राचीनकाल से ही नारी को शक्ति के रूप में पूजा जाता है। सशक्त नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला है. यह बात दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. भारती गोरे ने कही। वे राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, विदर्भ प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में ‘सशक्त नारी : सशक्त समाज’ विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में बोल रही थीं।
डॉ. भारती गोरे ने आगे कहा कि ब्रह्म और शक्ति एक ही हैं।
एक समर्थ नारी अपने परिवार को एक सूत्र में बांध कर रखती है। पुत्री, पत्नी, माता, बहु आदि विभिन्न रूपों में वह परिवार का संवर्धन और बच्चों को संस्कारित करती हैं। सशक्त नारी के जीवन को गढ़ देने में समर्थ परिवार से ही सशक्त समाज बनता है। समर्थ नारी पराक्रम में जितनी महान होती है, परिवार की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए महानतम त्याग से भी पीछे नहीं हटती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम से आया नारी विमर्श नारी मुक्ति के नाम पर युवतियों को भ्रमित कर रहा है। आज फैशन के जाल में स्त्रियाँ फँसती जा रही है। आज डिजिटल युग में बेटियों की सुरक्षा करना कठिन हो गया है।
राजमाता जीजाऊ साहेब की तरह यदि माँ ध्येयनिष्ठ हो तो छत्रपति शिवाजी महाराज का निर्माण होता है। डॉ. गोरे ने कहा कि भारत की नारी शक्ति ज्ञान, सम्मान और शक्ति में विश्व की सभी देशों की स्त्रियों से अधिक उन्नत रही हैं।
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने अपने प्रास्ताविक उद्बोधन में कहा कि स्त्री सृजन का पर्याय है। स्त्री शक्ति से ही सशक्त समाज का निर्माण होता है। किसी भी समुन्नत समाज का विकास उसकी स्त्री चेतना पर निर्भर करता है। कार्यक्रम का संचालन प्रा. जागृति सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. लखेश्वर चंद्रवंशी ने किया।
