भौर भई मेरी अम्बे माँ....
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- लखन लाल माहेशवरी (पूर्व व्याख्याता)
अजमेर (राजस्थान)
भौर भई निकल गया दिन मेरे अम्बे माँ,
तेरी हो रही जय जय कार मेरी अम्बे माँ।
अब तो दर्शन दे दो मेरी अम्बे माँ,
भक्त हुआ बेहाल मेरी अम्बे माँ ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ....
नवरात्रा आ गये मेरी अम्बे माँ,
मेरे घर पधारो मेरी अम्बे माँ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ ...
तू पहाडा वाली तू ज्वाला वाली,
तेरे दर्शन की प्यास मेरी माँ ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ ...
सबके काम करने वाली नज़र रखने वाली,
मेरे पर भी कृपा कर दो मेरी अम्बे माँ ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ .....
तेरे को रोज रोज जो धयावे,
उसकी इच्छा पूरी कर दो मेरी अम्बे माँ ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ
अम्बे रानी, दुर्गा, भवानी, चामुंडा कहलाने वाली, किसी रुप में दर्शन दे दो मेरी अम्बे माँ,
प्रेम लखन करे विनती सबका दुःख हर लो,
सबको खुश कर दर्शन दे दो मेरी अम्बे माँ।।
भौर भई मेरी अम्बे माँ.