महाकवि सुधाकर गायधनी विदर्भ गौरव पुरस्कार से सम्मानित
नागपुर। कृषि विकास प्रतिष्ठान की ओर से माणिकलाल गांधी की स्मृति प्रित्यर्थ विदर्भ के विकास के लिए योगदान अथवा विदर्भ का नाम रोशन करने वाले व्यक्ति को विदर्भ गौरव पुरस्कार दिया जाता है। २०२० का विदर्भ गौरव पुरस्कार महाकवि सुधाकर गायधनी को एक लाख रुपए नगद व सम्मानचिन्ह पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया गया।
इस अवसर पर वे बोल रहे थे कि अहंकार सुंदर हो तो ताजमहल बनता है और अहंकार कुरुप हो तो बीवी का मकबरा। अहंकार मन में रखकर कवि द्वारा रसिकों का अपमान करना सबसे बड़ा अपराध है। यह मनोगत महाकवि सुधाकर गायधनी ने व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्येष्ठ विचारक व साहित्यिक डॉ. श्रीकांत फडके ने की। पत्रकार व विचारक मधुकर भावे के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया। वरिष्ठ पत्रकार गणेश कनोटे की प्रमुख उपस्थिति थी।
सुधाकर गायधनी ने कहा कि कविता को सुंदर बनाने के लिए कविता का आशय और कविता की छवि एक सुंदर कलाकृति बनाती है। लेकिन अनेक कविताओं के बारे में ऐसा नहीं होता है। अनेक कवि की कविता का आशय समझने में समीक्षक अपने अनेक वर्ष बर्बाद करते हैं। अनेक बार जिसे जो अर्थ समझ में आता है, वह निकालता है। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. गिरीश गांधी और संचालन रेखा दंडिगे ने किया।
