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स्त्री लेखन चेतावनी देता है, चुनौती नहीं : ममता कालिया



नागपुर। स्त्री लेखिकाओं ने सृजन की नई जमीन तैयार की है। उन्होंने स्त्री के संघर्ष को वाणी दी है। स्त्री लेखन केवल पीड़ा की अभिव्यक्ति नहीं है, न ही अनुभव का बखान या बयान है बल्कि दुनिया की आधी आबादी की चिंता का स्वर है। स्त्री लेखन पुरुष प्रधान समाज के समक्ष चेतावनी है, चुनौती नहीं। 

यह बात सुप्रसिद्ध कथाकार ममता कालिया ने हिंदी विभाग राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेश्चनार में कही प्रमुख अतिथि के रुप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती पाशविकता इसका सूचक है कि स्त्री की वैचारिक शक्ति का मुकाबला करने में वह अक्षम है। 

हमें समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने के लिए भेदभाव रहित होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि इस समय स्खी लेखन प्रयोगात्मक दौर से गुजर रहा है। वह स्वाधीनता को पुनर्परिभाषित कर रहा है। 

उद्घाटन सत्र में प्रस्तावना और स्वागत उद्बोधन विभाग के अध्यक्ष मनोज पाण्डेय ने दिया। अतिथि वक्ता का परिचय राजकुमार केवलरमानी कॉलेज की हिंदी विभाग प्रमुख डॉ. गीता सिंह ने प्रस्तुत किया तथा आभार प्रदर्शन संतोष गिरहे ने किया। 

द्वितीय सत्र की अतिथि वक्ता डॉ. बीना शर्मा, निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा का स्वागत और परिचय वी. एम. वी. महाविद्यालय की हिंदी विभाग प्रमुख डॉ. आभा सिंह किया। डॉ. बीना शर्मा ने अपने उदबोधन में साहित्येत्तर क्षेत्र में स्त्री लेखन की स्थिति पर विचार व्यक्त किया। 

दूसरी अतिथि वक्ता प्रो. गीता नायक, विक्रम विश्वविद्यालय,उज्जैन का स्वागत एवं परिचय जी. एस. कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. नेहा कल्याणी ने दिया। डॉ. नायक ने अपने उद्बोधन में हिंदी कविता में स्त्री लेखन पर प्रकाश डाला। 

धन्यवाद ज्ञापन वेबिनार के समन्वयक डॉ. मनोज पाण्डेय ने किया। इस वेबिनार में पूरे देश से हिंदी प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।

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