अभी तो दिल जवान है एकांकी संग्रह का हुआ विमोचन
सिंधी एवं हिंदी भाषाओं के बीच सेतु का कार्य करेगी यह किताब : डा. आसूदाणी
नागपुर। सिंधी एवं हिंदी भाषाओं के बीच पुल का कार्य करेगा नगर के नाट्य लेखक किशोर लालवानी द्वारा लिखित हिंदी एकांकी संग्रह ‘अभी तो दिल जवान है। किशोर ने नाटक के एक अभिनेता के रूप में आज से करीब 44 वर्ष पूर्व सिंधी रंगमंच पर पदार्पण किया। आज वे न केवल नागपुर पर पूरे देश में एक बहु आयामी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। उक्त प्रदिपादन प्रसिद्ध कवि व विचारक डा. विनोद आसूदाणी ने सिंधी साहित्य सभा की अदबी बैठक में उपरोक्त पुस्तक के विमोचन समाराह में कहे।
प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक तथा भारतीय सिंधू सभा अमरावती के अध्यक्ष तुलसी सेतिया ने कहा कि नागपुर के प्रसिद्व लेखक किशोर लालवाणी सिंधी नाटकों की दुनियां का जाना पहचाना नाम है। मैंने उनके लिखे हुए कई नाटकों एव महानाटकों का निर्देशन किया है जिसे सिंधुड़ी यूथ विंग नागपुर की ओर से पेश किया गया है।
प्रख्यात साहित्यकार एवं महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्य अविनाश बागडे़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस नाट्य संग्रह की प्रस्तावना मैंने लिखी है। इस बहुप्रतीक्षित हिंदी सृजन के पूर्व किशोर लालवानी की कई सिंधी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जिनका मंचन अखिल भारतीय स्तर पर भी किया जाता है।
प्रस्तुत नाटक की पुस्तक में कुल पांच नाटकों का समावेश है। अपने आस पास के परिवेश से ही पात्रों को बीन कर अपने नाटकों के किरदार गढ़ना ये लेखक का मै एक नैसर्गिक लेखकीय गुण मानता हूं। हंसी मजाक में कहां आपको चिमटी काट लेंगे पता ही नहीं चलेगा।
रंगमंच से जुड़े हरभगवान नागपाल, किशन आसूदाणी, पी.डी. केवलरामाणी,राकेश मोटवाणी, हासानंद सतपाल, मीरा जाराणी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और मुक्त कंठ से पुस्तक की सराहना की।
इस अवसर पर राजेश आसूदाणी, दिलीप आसूदाणी, शारदा भागचंदाणी, राम हबलाणी, जिए सिंधी के संपादक राजेश स्वामनाणी, दीपक जज्ञासी, चंदू गोपाणी और मोहन भी उपस्थित थे।
