आज डॉक्टर भगवान, उसका दर्द समझे ना जहान
आज जब हर ओर महामारी का हाहाकार मचा हुआ है। हर ओर मौत का तांडव है। लोग अपनों को निरंतर खोते जा रहे हैं। लोग गिड़गिड़ा रहे अपनों को बचाने के लिये। आक्सीजन के लिये भी लोग तड़प रहे हैं। तो इस विकारल, भयावह त्रासदी मे धरा पे एक ऐसी सख्शियत भी हे जो भगवान के रुप मे नित - प्रतिदिन, हर पल मुश्तैदी से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं वो हैं डाक्टर और उनकी सहयोगी टीम नर्स, वार्ड ब्वाय आदि। निरंतर इन सभी की मेहनत - मशक्कत देखने को बनती है।
दिन - रात ये अपनी जान हथेली पे लिये अपनी तरह से वो हर एक संभव कोशिश कर रहें हैं की इंसानों को बचाया जा सके। ये सभी मिल मरीजों की अंतिम सांस तक उनको बचाने का प्रयास करते हैं। ऐसे वक्त मे आज ये डाक्टर और उनकी पूरी टीम महामारी के चलते अपने परिवारों से दस - दस दिन मिल भी नहीं पा रहे सिर्फ़ एक सोच की कहीं हम घर जाऐं और हमारे परिवार पर भी हमारे द्वारा महामारी का वार ना हो जाऐ।
अस्पताल मे ही बने कमरों मे रात गुज़ारते की कहीं रात मे किसी भी मरीज को उनकी जरूरत ना पड़ जाऐ। कब किस मरीज की हालत नाजुक परिस्थितियों मे जा पहुंचे ये कह पाना किसी के लिये भी असंभव सा है। इस विकराल कोरोना वायरस महामारी के चपेट मे आने वाले परिजनों के हर एक शख्स के लिये डाक्टर भगवान है। वो अपने अपनों को बचाने के लिये इन भगवानों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं। डाक्टर भी इंसान हैं वो हर एक संभव प्रयास कर रहे जो कर सकते हैं। परंतु डाक्टर भी इंसान हैं जितना उनके हाथ मे है वो कर रहे हैं। वो खुद इस समय अधिक से अधिक मरीज़ की सेवा मे लगे हुए हैं।
आज इस महामारी के चलते ऐसे बहुत से डाक्टर या उनकी टीम है जिनके परिवारों मे भी शौक की लहर है। उनके परिवार के सदस्यों को भी संक्रमण ने किसी न किसी रुप मे अपने चपेट मे ले ही रखा है। फिर भी वो अपने परिवार की पीड़ा को अधिक ध्यान न देते हुए दुनिया मे निकल चले अस्पतालों की ओर रुख कर अपनी जिम्मेदारी के प्रति वफादारी निभाते हुए। डाक्टर भी आखिर इंसान हैं। उनमें भी संवेदना है। उनमें भी अपनों के प्रति अथाह प्रेम है।वो भी चाहते की हम इस समय अपने अपनों के साथ वक्त बिताऐं। पर अपने कर्तव्य को पहले देखते वो। क्यों की डाक्टर ने डिग्री हाथ मे लेते समय कुछ शपथ ग्रहण किये थे बस उसी शपथ के प्रति कर्तव्यबध हो सब भूल जाते।
इंसानियत दिखाते हुए दिन - रात इन डाक्टर, नर्सों, वार्ड ब्वाय आदि समस्त टीम के बलिदानों को भुलाऐ ना भुलाया जा सकता है और ना ही हमें इनकी इंसानियत को भूलना चाहिये। बल्कि इनसे इंसानियत सीखने और इनके जज़्बे को सलाम करना चाहिये।
परंतु ऐसे महामारी के दौर मे कुछ लोग ऐसे हैं जो डाक्टर पर अत्यधिक दाब डाल रहे अपनों को बचाने के लिये डाक्टर भी इंसान हैं भगवान नही वो जितना संभव हो सकता उतना भरपूर प्रयास करते हैं। फिर भी यदि वो किसी मरीज को नहीं बचा पाते तो उनके परिजन जानवरों से व्यवहार कर अमानवीयता दिखाते हुए उन्हें मारते हैं। उनके अस्पताल मे तोड़फोड कर क्षति भी पहुंचाते हैं।अपनों को खोने के दर्द मे वो ये भी भूल जाते हैं कि जिस डाक्टर और उनकी टीम को वो मार रहे हैं वे कितने दिन से आराम से सो नहीं पाऐ हैं।
कोविड मरीज के सामने खुद हाजिर होते समय - समय पर ताकी उसके शारीरीक हलचलों और उसमें होने वाले पल - पल के परिवर्तन को देख सके। क्या उस डाक्टर को या उसकी टीम को वायरस अपनी चपेट मे नहीं ले सकता। ये जितना आम इंसा के लिये जानलेवा घातक वायरस है उतना ही घातक ये डाक्टर और उनकी टीम के लिये भी है। फिर भी ये अपनी जान की परवाह नहीं कर सबकी सेवा मे लगे रहते हैं।फिर भी इनकी पीड़ाओं को नजरअंदाज कर कैसे लोग इनके साथ अमानवीय व्यवहार कर सकते हैं। मानवता को शर्मसार करती ऐसी घटनाएं मन को छलनी कर देती है।
हाल ही मे शोशल मिडिया के जरिए एक शहर के संजीवनी अस्पताल के डाक्टर राजेश का पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हो गया। माता पिता अस्पताल मे ही इलाज करा रहे थे जिमे कुछ दिन पूर्व ही पिता की मृत्यु हो गई कोरोन वायरस के संक्रमण के चलते परंतु डाक्टर राजेश अपने पिता का अंतिम संस्कार कर मात्र चार - पांच घंटे बाद पुनः अपने फर्ज को निभाते हुए मरीजों की सेवा मे लग गये क्या इनके बलिदान को भुलाया जा सकता है।
गुजरात के एक अस्पताल मे ही एक मुस्लिम नर्स जो की अपने धर्म के प्रति कर्तव्य निभाते हुए रोजे भी रखे और साथ मे मां भी बनने वाली हैं फिर भी वो अपनी तकलीफ भूल अपनी भूख प्यास भूल मरीजों की तिमांदारी मे लगी हुई हैं। फिर भी लोग अपने अपनों की पीड़ा मे इतने स्वार्थी हो जाते हैं की उन्हें धरा पे रह रहे हमारे अपनों की सेवा मे लगे बिना किसी जात - पात,अमीरी - गरीबी का भेदभाव करते हुए ऐसे धरा के भगवान के साथ ऐसा अशोभनीय कृत्य मन को झकझोर जाता।
डाक्टर भी इंसान हैं, उनमें भी संवेदनाएं हैं अपने अपनों की भी फिक्र है उन्हें फिर भी उनके साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है। इस महामारी मे इस समय सभी से सभी को सहयोग और सौहार्द, हमदर्दी, एकता, साथ की जरुरत है। अपनी पीड़ा मे इतना ना डूब जाओ की दूसरों का दर्द नजर ही ना आऐ।
- वीना आडवाणी 'तन्वी'
नागपुर, महाराष्ट्र

