मां...
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तू ही नदिया
सागर भी तू ही.
तू ही धरती
आकाश भी तू ही ।
तू ही बोली
मौन भी तू ही .
स्नेह ममता की
वाणी "माँ" तू ही ।
तू ही असीम,
शून्य भी तू ही .
कण - कण में समाया
विश्वात्मा, तू ही ।
स्नेह ममता
प्रेम और धीरज
आंचल तेरी
कोमल नीरज।।
तुझ बिन सुना
यह जग सारा
तेरी पूजा,
गौरव मेरा।।
नागपुर (महाराष्ट्र)