कोरोना, हम और हमारा अस्तित्व
https://www.zeromilepress.com/2021/05/blog-post_85.html?m=0
नागपुर। आज हमें हमारा अस्तित्व खतरें में नजर आ रहा है। इस कोरोना नामक महामारी ने हमें यह सोचने पर मजबुर कर दिया की, क्या सच मे हम नये युग की ओर प्रस्थान कर रहें है। हां हम एक्कीसवी सदी मे जी रहे है मगर हमारी संस्कृती, संस्कार, संयुक्त परिवार, आयुर्वेद प्रणाली आदी को दाव पर रखकर। हम चमक दमक को अपना विकास समझ बैठे और मिट्टी को गंदगी कहकर ऩफरत की निगाहों से देखने लगे, लेकिन यही मिट्टी अनाज उगाकर हमारा पेट पालती है यह भुल गये। यही मिट्टी हमे शांती, संस्कार सिखाती है, मन मे एकता का भाव जगाती है, आयुर्वेद, अपनो की और संस्कृती की पहचान कराती है।
इस मिट्टी मे हमने खेलना बंद कर दिया। कुस्ती, अखाडे़, मैदानी खेल छोडकर हम मोबाईल मे पब्जी और सट्टेबाज खेल खेलने लग गये, परिणाम शारीरिक कमजोरी का शिकार होने लगे। घर की दादी नानी ने बताये आयुर्वेदिक नुस्खे उपचार प्रणाली छोडकर छोटी छोटी बातो पर अस्पताल पहुच गये, परिणाम शरीर की इम्युनिटी पावर खत्म कर दी। छोटे छोटे बच्चो के शरीर मे जहर घोलना सुरू कर दिया। योगा, प्राणायाम, सूर्यनमस्कार, दौड, उछलकुद इन सभी को भुल गये, परिणाम यह हुआ की आज इस महामारी मे कोरोना के सुक्ष्म विषाणू से लढने की शक्ती भी हमारे शरीर मे नही रही, हम असमर्थ हो गये। क्या यही हमारा विकास है, आज भी पुराने दिन याद करे तो सोचने पर मजबुर होनी पडता है।
इस धरती ने कितने बलशाली महाविरो का इतिहास रचा है, जो इस देश की मिट्टी और संस्कृती के लिये रात दिन अपनी आन बान और शान के लिये बिना रूके - बिना थके लढते रहे। और आज की हमारी पिढी उपर से सुंदर, मगर अंदर से खोकली बन चुकी है। हमने अपने साथ साथ इस मिट्टी, नदी, हवा और बारीश का भी अस्तित्व धोके मे डाल दिया। बडी बडी इमारतो को बनाने मे जंगल नष्ट कर दिये, गाडीयो और कारखानो के धुये से आकाश को भर दिया, प्लास्टिक और रसायनो से नदियो का पाणी गंदा कर दिया। धरती से ऑक्सिजन और पाणी खत्म हो रहा है।
यही वजह है आज हमे अस्पताल मे ऑक्सिजन के लिये रोना पड रहा है, और बेसमय मौत हम पर हावी हो रही है। ईसपर चिंतन करना जरूरी है। हमारी आनेवाली पिढी को बचाने के लिये पेड लगाना और उनको जिवीत रखना हमारा परम कर्तव्य है। आओ हम सब मिलकर प्रण करे, अपने विकास और अस्तित्व के लिये विज्ञान और तंत्रज्ञान के साथ साथ अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृती को फिर से अपणाये, और आनेवाली पिढी को सक्षम एवं समर्थ बनाये।
(संस्थापक अध्यक्ष)
अस्तित्व फाऊंडेशन, नागपुर.

