श्री कृष्ण जन्माष्टमी की थीम पर लेखिकाओं का गेट-टुगेदर एवं काव्यपाठ
आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। चिनार पार्क में कवयित्रियों ने गोपियों का रुप धर कर काव्यपाठ किया। सभी फूलों के गहने पहनकर तैयार हुए। सभी ने मिलकर रास भी खेला और फेसबुक लाइव भी किया। आरिणी संस्था की अध्यक्ष डॉ मीनू पाण्डेय ने बताया कि इस बार के काव्यपाठ के लिए सभी लेखिकाओं में खासा उत्साह देखा गया।
कार्यक्रम का संचालन सुनीता शर्मा सिद्धि ने किया। कार्यक्रम की रुपरेखा लीना वाजपेयी ने तय की। कार्यक्रम में 30 से अधिक रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आरंभ मालती शुक्ला एवं डॉ रंजना शर्मा के भजन द्वारा हुआ। सभी रचनाओं पर हरमोनियम की संगत डॉ रंजना शर्मा द्वारा दी गई। प्रमुख रचनाकारों के द्वारा प्रस्तुत की गयी रचनाऐं हैं :
वृंदावन में नाचे मोर, मै भी नाचूंगी
मेरे मन मन में उठे हिलोर, मै भी नाचूंगी।
लीना वाजपेयी आनंदलीना
मोर मुकुट पीतांबर धारी
श्री राधे प्रिय कृष्ण मुरारी
सुनीता शर्मा सिद्धि भोपाल
कृष्ण गुम हैं राधिका में,मुरली का स्वर रस घोलता है।
नयन बतियाते नयन से,मौन ही कुछ बोलता है।
प्रेक्षा सक्सेना
कान्हा मेरे कान्हा एक बार फिर आजा,
मैं तेरी राधा मैं तेरी मीरा आजा मेरे कृष्णा कान्हा ओ मेरे कान्हा
है रास रचैया तुम्हें याद करूँ
आ जाओ हमारे आँगन में
नीलिमा पालीवाल
सगले गांव से मोरी अनबन है
न समझे मोहे, समझे झल्लन है
देखो मेरी,देखो ये ठिठोली उड़ावे
कान्हा है सखा मेरा इनको न भावे
सुसंस्कृति सिंह कृति
मोहे आज भाय गई
सखीरी लुभाय गई
लोन छवि देख देख,कैसी मुस्काय रही
डॉ रंजना शर्मा
कृष्ण जन्माष्टमी है युग परिवर्तन।
कल्पना विजय
माँगें माँगे री मखनवा को दान
कन्हैया तेरो मतवालो
शेफालिका श्रीवास्तव
रे माखन की चोरी छोड़ कन्हैया मैं समझाऊँ तोय
मधूलिका सक्सेना
मधुसूदन गोविंद गोपाला, तुम ही युगल किशोर
श्यामल श्यामल भोली सूरत, खींचे अपनी ओर
डॉ मीनू पाण्डेय नयन


