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समाज में कर्तव्यनिष्ठ सेवा का होता है सत्कार : प्रो. संजय दुधे


नागपुर। जीवन में व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्य करे, समाज उसकी कर्तव्य -निष्ठा का मूल्यांकन करता है। वास्तव में सम्मान-सत्कार व्यक्ति का नहीं, उसके कर्म का होता है। हमारे कर्म ही हमारे जीवन की सार्थकता तय करते हैं।यह विचार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरू प्रो. संजय दुधे ने मानविकी संकाय के डीन एवं लोक प्रशासन विभाग के अध्यक्ष प्रो. निर्मल कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित कार्य गौरव सत्कार समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंह ने विद्यापीठ की विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए ३८ वर्ष तक  निष्ठापूर्वक अध्यापन कार्य किया। यह मिशाल है और एक अनुकरणीय उदाहरण भी। समाज के निर्माण में शिक्षक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समृद्ध और खुशहाल राष्ट्र के निर्माण के लिए कर्तव्यनिष्ठ नागरिक समाज की आवश्यकता है जिसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों की है।


कार्यक्रम की प्रमुख अतिथि थी विद्यापीठ शिक्षण मंच की अध्यक्ष, पूर्व महापौर डॉ. कल्पना पांडे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति के कार्यक्षेत्र का दायरा भी बढ़ जाता है और जिम्मेदारी भी। स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए व्यक्ति समाज के निर्माण में प्रेरक उदाहरण स्थापित कर सकता है। आज हमारे समाज को इसकी बड़ी आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने अपने अध्यापन काल में जिस प्रकार गौरवपूर्ण कार्य किया है, वैसा ही आगे भी करते रहेंगे, ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। प्रो. निर्मल सिंह ने अपने प्रति-सत्कार में कहा कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं नागपुर विद्यापीठ जैसी गौरवशाली संस्था का हिस्सा रहा और एक ऐसे विभाग में कार्य किया जिसकी देश में एक विशिष्ट पहचान है। 
     
मानविकी संकाय एवं पूर्व छात्रों द्वारा गठित सम्मान समारोह समिति के तत्वावधान में माननीय प्र-कुलगुरू के हाथों प्रो. निर्मल कुमार सिंह का सत्कार किया गया। इस अवसर पर विद्यापीठ में नवनियुक्त डीन डॉ संजय कविश्वर, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय और डॉ प्रशांत माहेश्वरी, विज्ञान एवं तकनीकी संकाय का भी सत्कार माननीय प्र-कुलगुरू के हाथों किया गया। प्रस्ताविक डॉ चंद्रशेखर गिते ने रखा तथा संचालन हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने किया। आभार  इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवि खंगई ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ प्रमोद मुनघाटे, डॉ. स्मिता आचार्य, डॉ संजय पल्वेकर, डॉ. सोपानदेव पिसे, डॉ अभय मुद्गल, डॉ. सत्यप्रिय इंदुरवाडे, डॉ श्याम कोरेटी सहित अनेक प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थे।
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