सुधा सतसई का लोकार्पण
प्रत्येक दोहा अपने आप में एक खण्ड काव्य : डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा
नागपुर। नागपुर की विदुषी कवयित्री सुधा राठौर के 700 दोहों का संग्रह 'सुधा सतसई' का लोकार्पण गरिमामय आयोजन में सम्पन्न हुआ. मंच पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ वेदप्रकाश मिश्रा, प्रमुख अतिथि डाॅ गिरीश व्यास, विशेष अतिथि डाॅ सागर खादीवाला, विनय मोहंता, दीप्ति कुशवाह एवं दोहाकार सुधा राठौर के साथ प्रकाशक अविनाश बागड़े उपस्थित थे.
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उत्कर्ष सभागृह में परिजनों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति कोरोना प्रोटोकाल के हिसाब से संयमित रखी गयी थी. कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने कहा कि सुधा राठौर का हर दोहा खण्ड काव्य है . उन्होंने सुधा राठौर की लेखनी की प्रशंसा करते हुए उन्हें नागपुर का गौरव कहा.
मुख्य अतिथि गिरीश व्यास ने कहा कि इस महत्वपूर्ण किताब को ज्यादा पाठकों तक पहुँचना चाहिए . विशिष्ट अतिथि डाॅ सागर खादीवाला का कहना था कि दोहा लेखन आसान नहीं है. लय और गति के कारण रहीम और कबीर के दोहे आज भी लोगों को याद रहते हैं. विदुषी दीप्ति कुशवाह ने सुधा राठौर की इस कृति को साहित्य साधना में अति महत्वपूर्ण कहा.
कार्यक्रम का संचालन अविशा प्रकाशन के संचालक अविनाश बागड़े ने किया. कार्यक्रम का शुभारम्भ रचना पंजाबी की सरस्वती वंदना से हुआ और कवि अनिल मालोकर ने आभार प्रदर्शन किया. इस गरिमामय आयोजन में सुरेश सिंह राठौर, कृष्ण नागपाल, राकेश भैया, रचना पंजाबी, रीमा दीवान चड्ढा चंद्रलेखा सिंघेल, अंजुलिका चावला, रंजना श्रीवास्तव, प्रभा मेहता, उमा गौतम, ऐषा चैटर्जी, निर्मला पांडेय, शिल्पी पांडेय, शग़ुफ़्ता यास्मीन क़ाज़ी,नीलम शुक्ला,उषा ठाकुर,रोहिणी पंजाबी प्रवीण गौतम, राजेश स्वामनानी पप्पी, कुणाल सिंह, रुचि पंजाबी और आर्यन पंजाबी उपस्थित थे.