अंगदान से नया जीवन प्राप्त होता है : डॉ. आचार्य
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नागपुर। छः साल की एक बच्ची अपने आंगन में खेल रही थी। खेलते खेलते वह सामने ही सड़क पर आ गई जहां वह एक कार के नीचे आ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मस्तिष्क मृत घोषित किया गया।
इस दुखद स्थिति में भी बच्ची के माता पिता बच्चे के अंगदान करने के लिए आगे आए। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि हमारी बच्ची तो अब नहीं रही, लेकिन अगर उसके अंगदान से कुछ और मरीजों की जान बच सकती है तो हम बच्चे के अंगों को दान करना चाहेंगे।
डॉक्टरों ने उन्हें उचित सलाह दी और बच्चे के किडनी, दिल, ह्रदय, फुफ्फुस, आंखें और लीवर को दान किया गया। इससे छह व्यक्तियों को जीवनदान मिला और दो को आंखों की रोशनी।
हमें कई बार मरीजों के रिश्तेदार पूछते हैं कि मरणोपरांत अंग दान कर सकते हैं क्या? जी हां, मरणोपरांत अंगदान संभव है।
जब कोई कारण से मस्तिष्क मृत हो जाएं चाहे वह चोट के कारण हो अथवा ब्रेन ट्यूमर के कारण हो या दिल की गति रुक जाने के कारण हो, अगर मस्तिष्क में रक्त संचालन ना हो तो मस्तिष्क मृत हो जाता है और ऐसे में व्यक्ति के बचने की कोई संभावना नहीं रहती।
तब मरीज के रिश्तेदार अंग दान कर सकते हैं। किडनी, लीवर, दिल, फुफ्फुस, पेनक्रियाज, चमड़ी बोन-मैरो इत्यादि अंग दान किए जा सकते हैं । मरीज का मस्तिष्क मृत रहता है जिससे उसे कोई तरह का दर्द महसूस नहीं होता ।
हमारे देश में ऐसे कई मरीज हैं जो किडनी फैल्योर से पीड़ित हैं और डायलिसिस पर जिंदा रहते हैं, ऐसे कई मरीज हैं जिन्हें फुफ्फस की खराबी से दम आते रहता है और जीना दूभर हो जाता है, अथवा दिल की खराबी से उनकी दिल की शक्ति इतनी कम रहती है कि वह साधारण कामकाज भी नहीं कर सकते। ऐसे मरीजों को इस तरह के अंगदान से नया जीवन प्राप्त होता है।
- डॉ शिवनारायण आचार्य, नागपुर, महाराष्ट्र
(लेखक प्रख्यात किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सक हैं। और सेंट्रल इंडिया किडनी फाउंडेशन सेंट्रल इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष एवं नेफ्रोलॉजी सोसाइटी के संस्थापक सदस्य है।)