वैदिक गणित प्रतियोगिता को मिला उत्तम प्रतिसाद
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लालवानी की स्मृति में भारतीय ज्ञान मंच का आयोजन
नागपुर। भारतीय ज्ञान मंच द्वारा प्रख्यात शिक्षाविद् चेतराम लालवानी की स्मृति में वैदिक गणित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इसमें सबसे पहले उन्हें वैदिक गणित सिखाया गया. इसके पश्चात, विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र की तैयारी के लिए पांच दिनों की अवधि दी गई. 10 सितंबर को छात्रों ने वैदिक गणित की प्रतियोगिता में पूछे गए प्रश्नों को हल किया. 5वीं कक्षा से 10वीं कक्षा तक के स्कूली छात्रों के लिए आयोजित यह प्रतियोगिता ऑनलाइन थी और छात्रों ने इसे अपने मोबाइल पर ही किया.
इस निशुल्क प्रतियोगिता में देश भर से तकरीबन 400 विद्यार्थियों ने भाग लिया. जूही लालवानी ने अपने वक्तव्य में चेतराम लालवानी का जीवन परिचय देते हुए कहा कि उनका जीवन महर्षि दयानंद जी के विचारों से प्रेरित था. उन्होंने जिस प्रकल्प की शुरुआत की, उसके फलस्वरूप हज़ारों छात्राएं मुफ्त शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. उनके मार्गदर्शन के कारण स्त्री शिक्षा को एक नया स्वरुप मिला. उन्होंने जनकल्याण तथा समाजकल्याण के लिए अनेक कार्य किये.
आधुनिक युग में भी वे ज़मीन से जुड़े रहे. डॉ. वंदना खुशालानी ने कहा कि चेतराम लालवानी स्वतंत्रता और स्वराज हेतु पृथक हवन करवाते थे. उनका जीवन स्वदेशी, स्वभाषा तथा स्वराज के लिए समर्पित था. आर्य समाज के विचारक थे, समाज को और व्यक्ति विशेष को आर्य बनाने में कार्यरत थे ताकि देश पुन: अपनी गौरवशाली आर्याव्रत की परंपरा को प्राप्त कर सके.
राजेश लालवानी ने कहा कि दादा जीवन भर आर्य समाजी विचारों के अनुसार शिक्षा का प्रचार प्रसार करते रहे और वे शिक्षकों के प्रेरणास्त्रोत थे, अत: उन्होंने शिक्षक दिवस पर उनकी पुण्यतिथि आयोजित करने हेतु प्रयास किये. डॉ. भारत खुशालानी, जिन्होंने इस प्रतियोगिता का आयोजन तथा संचालन किया, ने शिक्षा के अंतर्गत वैदिक गणित का इस प्रतियोगिता के लिए चयन किया क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों की महत्ता के बारे में सम्पूर्ण देशवासियों को प्रोत्साहित किया था और वेदों का प्रचार किया था.
विद्यार्थियों तथा उनके पालकों ने इस प्रयास की भरसक सराहना की तथा ऐसे ही अन्य बुद्धिबली सत्रों की मांग की. डॉ. भारत खुशालानी ने विद्यार्थियों को पारम्पारिक गणित से हटकर गणित के प्रश्नों को सुलझाने के तरीकों से अवगत कराया. जगद्गुरु स्वामी कृष्ण तीर्थ जी महाराज द्वारा प्रस्तावित 16 वैदिक सूत्रों के वैदिकीय गणित का अंश सिखाते हुए उन्होंने ‘निखिलं नवतश्चरमं दशत:’ और इस सूत्र के उपप्रमेय ‘यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्ग च योजयेत’ पर विद्यार्थियों को विशेष ध्यान दिलाया.
सभी छात्रों को इन सूत्रों पर आधारित गणित प्रणालियाँ बेहद आसान लगीं जिससे वे कुछ ही सेकंडों में जटिल से जटिल बडी संख्या वाले गणित के प्रश्न हल करने में सक्षम हो गए. दशकीय आधार सिखाते हुए वैदिक सूत्र से वर्ग करने जैसी गूढ़ गणितीय पद्धतियाँ किस प्रकार से सरल बन जाती हैं, इसके कई नमूने छात्रों के समक्ष रखे.
