तिरंगा साई धाम...
हरेला पर साई भक्तों ने लगाए हजारों वृक्ष
नागपुर/टिहरी। शिव साई तिरंगा साई धाम जो प्रसिद्ध है तिरंगा साई धाम के नाम से, जो गणेश पर्वत ग्राम भाँगला पट्टी दोगी जिला टिहरी गढ़वाल उत्तराखण्ड में है। तिरंगा साई धाम के संस्थापक है साई साधक मदन लाल गैरोला।
ऋषिकेश से करीब 60 किलोमीटर दूर बद्रीनाथ ऋषिकेश हाइवे से थोड़ी दूर अंदर गणेश पर्वत ग्राम भाँगला टिहरी गढ़वाल में पर्वत-श्रृंखलाओं की हरी भरी वादियों तथा सुन्दर रमणीय दृश्य देखने योग्य है।
20 अक्टूबर 2011 की साई तिरंगा धाम की भूमि पूजन हुआ था। जयपुर राजस्थान से साई बाबा जी का दिव्य स्वरूप लाया गया जिस का वजन 22 क्विंटल था। साई स्वरूप को मुख्य सड़क से ऊपर पहाड़ में ले जाना बहुत कठिन था वहाँ क्रेन भी नही जा सकती थी। साई जी की मूर्ति को जो 22 क्विंटल वजन की थी जो सिर्फ पांच साई भक्तों ने उठाया था। साई जाप ओर मन्त्रो की गूंज में सीढ़ियो से चढ़ते हुए पहाड़ी पर स्थित मन्दिर तक साई बाबा ने किया चमत्कार इतनी वज़नी मूर्ति एक फूल के समान हो गई और 4 मई 2014 को साई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा किसी परेशानी के बिना स्थापित हो गई।
4 मई 2014 में तिरंगा साई धाम की विधिवत पूजन साई साधक मदन लाल गौरेला ने अपने ब्रह्मलीन परम पूज्य गुरुदेव सन्त श्री मौनी बाबा जी की कृपादृष्टि ज्ञानवान संतों एवं ब्राह्मणो द्वारा सम्पूर्ण पूजन करवाया गया था।
1962 में जबलपुर मध्यप्रदेश से आकर पूज्य मौनी बाबा जी ने के ऋषिकेश में गंगा माँ की ओर साई बाबा जी की पूजा अर्चना आरंभ की ओर अपनी तपोभूमि ध्यान भूमि में 1990 में भी गंगा जी की जलधारा के समीप साई कोनार मन्दिर साई घाट का निर्माण करवाया जो उत्तराखण्ड का प्रथम साई मन्दिर कहलाता है।
संजोग की बात संत मौनी बाबा जी ने 15 अक्टूबर 2007 में महासमाधि ली मन्दिर के प्रागण में मौनी बाबा जी की समाधि भी बनी हुई है जैसे कि सभी साई भक्तों को विदित है कि साई बाबा जी की महासमाधि के दिन भी 15 अक्टूबर है। ऋषिकेश में आदरणीय साई साधक मदन लाल गैरोला ने अपने गुरुदेव संग साई पूजन के कार्य को आगे बढ़या।
परम पूज्य गुरुदेव संत मौनी बाबा जी एवम स्व. पिता श्री जी ने अपने लाडले भक्त पुत्र मदन लाल गैरोला को स्वप्न में द्रष्टांत 8 दिन तक दिया और साथ ही मन्दिर के लिए भूमि दिव्य इंद्रधनुष के सप्त रंगों की जगह दिव्य 3 रंग आकाश में दिखाए जो ध्वज तिरंगे का प्रतीक था साई कृपा से शिव साई तिरंगा साई धाम का निर्माण करवाया।
मन्दिर के निर्माण से पहले साई बाबा का झण्डा लगाया गया पहाड़ रास्ता भी बहुत कठिन था छोटी सी पगडंडी थी। बाबा ने ऐसा चमत्कार किया कि झण्डा लगाने के केवल 9 दिन के पश्चात ही करीब सात मीटर चौड़ी सड़क पास जो गई लगभग दो महीने के अन्दर एक भव्य सुन्दर सड़क का निर्माण आरम्भ हो गया था।
समस्त ग्राम निवासी साई बाबा का दिव्य चमत्कार ही मानते हैं। शिव साई तिरंगा साई धाम में कल्पेश्वर महादेव, उत्तराखण्ड के कुल देवता सेम नागराजा, शिवअंश रामभक्त हनुमान जी विराट रूप, बाबा जी की द्वारकामाई (बाबा की धूनी), साई भक्त निवास और भव्य लेण्डी बाग का निर्माण भी करवाया जिसमें फूलों के साथ साथ पीपल, बरगद, नीम, आँवला, लीची, नाशपती, जामुन, पपीते, केले के पेड़ ओर अन्य वृक्ष पेड़ पौधों लगाए हैं।
उत्तराखण्ड में मनाये जाने वाले उत्सव हरेला पर साई भक्तों के साथ मिलकर करीब 5000 वृक्ष लगाये है उन्हे यह पौधें जंगल विभाग की पौध शाला से प्राप्त हुई थे। तिरंगा साई धाम में अब श्री साई चावडी निर्माणधीन है।
उत्तराखण्ड की शान है, पहाड़ो का मान है, भारत माता का अभिमान है भारत माता के तीनों रंगों में रंगा यह शिव साई धाम करता है चमत्कार जिसकी तिरंगा है पहचान।
तिरंगा साई धाम अपने आप मे एक सिद्ध तीर्थ स्थल बन गया है और अब साई भक्त यूट्यूब चैंनल साई उदी सेवा में तिरंगा साई धाम के दिव्य दर्शन भी कर सकते हैं। - इति श्री -
!! ॐ श्री सद्रगुरु साईनाथार्पणमस्तु !! शुभं भवतु !!
- सुनील विरमानी (दिल्ली)
साई उदी सेवक
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