परमात्मा के नाम सिमरन व सत्य व्यवहार से मोक्ष : अधि. ममतानी
श्री कलगीधर सत्संग मंडल ने गुरुनानक देव जी ज्योति-ज्योत गुरपूरब मनाया
नागपुर। जरीपटका स्थित श्री कलगीधर सत्संग मंडल द्वारा आयोजित गुरु नानकदेवजी ज्योति-ज्योत गुरपूरब ऑनलाइन कार्यक्रम में अधि. श्री माधवदास ममतानी ने बताया कि गुरु नानकदेवजी कलियुग के जीवों को तारने हेतु संसार का भ्रमण करते हुए मथुरा पहंुचे जहां उन्होंने यमुना घाट पर स्नान कर सभी मंदिर व स्थान देखे। वहां गुरुजी की भेंट व ज्ञान चर्चा काशी के एक विद्वान पंडित से हुई।
पंडित ने कहा, हे संतवर! काशीपुरी का महातम तो सर्वविदित है। चाहे कितना भी कोई पापी हो परंतु काशी में शरीर त्यागने से उसे मोक्ष प्राप्त होता है। तब गुरुजी ने कहा पंडितजी, परमात्मा के नाम सिमरन का महत्व ऐसा है जिसे कोई कहां भी, चाहे काशी में या किसी दूसरी जगह करे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गुरुजी ने कहा, पंडितजी! भगत कबीर अंतिम समय में काशी को त्यागकर मगहर की धरती पर जा बसे, जहां उस समय मान्यता थी कि मगहर की धरती पर शरीर त्यागने वाला गधे की योनी को प्राप्त होगा। परंतु भगत कबीर ने अंतिम समय में मगहर की धरती पर परमात्मा के नाम व सत्संग के प्रभाव से मोक्ष पाया इसलिए ईश्वर का नाम सभी स्थानों पर तारने वाला है। नाम के आश्रित जीव किसी भी स्थान पर कल्याण व मोक्ष को प्राप्त हुए हैं।
काशी में मरने से मोक्ष नहीं मिलता बल्कि मोक्ष देने की शक्ति परमात्मा के नाम सिमरन व सत्य व्यवहार में है। यदि कोई काशी में रहकर भी सिमरन न करे व असत्य व्यवहार करे तो उसे मोक्ष मिलने वाला नहीं है। अतः परमात्मा का नाम जपने एवं सत्व्यवहार करने से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। मनहु कठोरु मरै बानारसि नरकु न बाँचिआ जाई।। हरि का संतु मरै हाड़ंबै त सगली सैन तराई।। (श्री गुरु ग्रथ साहिब, अंग-484) तब पंडितजी ने पूछा, गुरुजी! ईश्वर के नाम तो अनेक हैं कृपया बताएं कौनसा नाम मुक्ति देने वाला है ?
गुरुजी ने फरमाया पंडितजी, परमात्मा के नाम तो असंख्य हैं 'असंख नाव असंख थाव' जिस प्रकार नदी के तट पर अनेक नावें होती हैं, मुसाफिर किसी भी नाव पर बैठ जाए वह उसे पार ले जाएगी, ठीक उसी प्रकार परमात्मा के सभी नाम व भक्त का सत्य व्यवहार भवसागर से पार ले जाने की शक्ति रखता है। यह उपदेश सुन पंडित जी प्रसन्न हुए और वहां उपस्थित सभी की शंकाएं दूर हुई तथा वहां गुरुजी के अनन्य भक्त हो गए तथा सतनाम के सिमरन से जुड़ गये।
ऑनलाइन कार्यक्रम दोपहर 2 बजे पांच श्री जपुजी साहिब के पाठ से शुभारंभ हुआ, तत्पश्चात सुखमनी साहिब का पाठ किया गया। कार्यक्रम का समापन विधिपूर्वक आरती, अनंद साहिब, ग्यारह गुरुओं व दसम ग्रंथ में वर्णित आदि शक्ति भवानी माता की स्तुति, अरदास व प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर सीरा-पुरी प्रसाद का वितरण किया गया।