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अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच एक और विश्व कीर्तिमान की ओर अग्रसर


भारत को जाने महाकाव्य का 23 अक्टूबर से 37 दिन तक होगा लाइव प्रसारण

भारत के 28 राज्यो व 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 278 रचनाकार होंगे

नागपुर/नई दिल्ली। तीन विश्व कीर्तिमान स्थापित करने के बाद "अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच" एक नए विश्व कीर्तिमान की ओर अग्रसर, एक महाकाव्य अनुष्ठान "भारत को जानें" 23 अक्टूबर से आयोजित करने जा रहा है।

यह अप्रतिम काव्य अनुष्ठान भारत के प्रत्येक राज्य की विशेष जानकारियों को रुचिकर रूप में जन जन तक पहुँचाने का कार्य करेगा। यह काव्य महोत्सव 23 अक्टूबर से 30 नवम्बर तक 37 दिनों प्रतिदिन एक काव्य कार्यक्रम में भारत के एक राज्य का वर्णन दोहों और चौपाइयों के माध्यम से किया जाएगा। हिन्दी और क्षेत्रीय भाषा में राज्य महिमा काव्य प्रस्तुति भी रहेगी।

कार्यक्रम में भारत की नामचीन साहित्यिक विभूतियां पद्मश्री अनूप जलोटा, पद्मश्री अशोक चक्रधर, पद्मश्री हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा, उच्चायुक्त बिनाया श्रीकांत प्रधान, निदेशक संतोष जीआर, घमंडी लाल अग्रवाल, सोम ठाकुर,आदिल रशीद, निवेदिता झा, शिव ओम अंबर , कवि पंकज शर्मा, आचार्य भगवत दुबे, सलीम जावेद, कवि लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, सौरव गुर्जर, कवि सुदीप भोला, डॉ. सुरेश अवस्थी, भगवत स्वरूप, डॉ. राम स्नेही लाल शर्मा यायावर, सुशील भारती, संग्राम सिंह, डॉ. मृदुल, शैल अग्रवाल, डॉ नवीन चंद्र, अखिलेश मिश्रा , अरुण जेमिनी, समीक्षा शर्मा, डॉ हरीश नवल, मंजरी पांडे बनारसी, पंडित सुरेश नीरव, कवयित्री डॉ. कीर्ति काले, डॉ अमरनाथ अमर, प्रशांत इंगोले, सरदार मंजीत सिंह, श्याम स्नेही लाल शर्मा अखिलेंद्र मिश्रा आदि अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे, जो प्रत्येक राज्य के वीडियो एल्बम का वर्चुअल माध्यम से विमोचन करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच की संस्थापिका डॉ. ममता सैनी (तंजानिया) ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत के 28 राज्यो एवं 8 केंद्र शासित प्रदेशों को विषय बना कर  278 रचनाकारों द्वारा महाकाव्य में रचनाएँ हिन्दी भाषा में दोहे तथा चौपाई छन्द में लिखी गई हैं। जिसके लिए हर राज्य की जानकारी को 7 वर्गों में विभाजित किया गया है । आभासी पटल "अन्तरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच" (https://www.facebook.com/groups/189600548966388/?ref=share) पर 37 दिनों तक रचनाकारों द्वारा लाइव प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। भारत को जानें परियोजना का एकमात्र  उद्देश्य समस्त भारत के विषय में  जन-जन को जानकारी प्रदान करना है।

अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच के मार्गदर्शक एवं मुख्य सलाहकार सीए. अजय गोयल (तंज़ानिया) ने बताया कि इस महाकाव्य को विश्व कीर्तिमान का स्थान प्राप्त होना लगभग निश्चित है। इस ऑन लाइन प्लेटफॉर्म्स और देश विदेश के विभिन्न पुस्तकालयों में शामिल कराया जाना है ताकि यह आने वाली पीढ़ी के लिए ज्ञान का स्रोत बने। काव्य मंच की मुख्य सहयोगी सारिका फ़लोर (केन्या) ने उत्साह के साथ बताया कि आयोजन की सारी तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली गई हैं और अब आयोजन की तिथि की प्रतीक्षा है। 

अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच के अन्य सभी सहयोगी  राकेश कुमार सैनी (तंजानिया), डॉ. शम्भू पंवार (भारत), शिल्पी बिसारिया (केन्या), ललिता माथुर चौहान व जितेंद्र भारद्वाज (तंजानिया), बिनीता श्री  वास्तव व गोविन्द गुप्ता (भारत) , वन्दना राज (कतर) भी आयोजन को सफल बनाने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं।

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