मन...
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कुछ बतियाने जी करे मनवा,
जी में मनों का बोझ रे मनवा,
जी हलको करने जी करे मनवा,
हाय, बावरा हो गई रे मनवा।
बेदरद ठोकरें खई के मनवा,
त्राहि त्राहि करे है मनवा,
कोमल परश को तरसे मनवा,
ताजी हवा की चाह में मनवा।
पंख फरफराये
घायल मनवा।
तड़पे हिया
बेचैन है मनवा,
एकला रोए बेचारा मनवा।
कुछ तो जतन कर सम्हल रे मनवा,
संजीवनी औषधि दे
रे मनवा।।
- डॉ. शिवनारायण आचार्य
नागपुर, महाराष्ट्र