सहिष्णुता से करें समाज व देश का निर्माण : डॉ रुपाली चौधरी
मैट्स यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति केंद्र में विशेष व्याख्यान
नागपुर/रायपुर। सहिष्णुता वह गुण है जिसके माध्यम से अनेक संघर्षों का सामना किया जा सकता है और विजय प्राप्त की जा सकती है। सहिष्णुता से हर संकट का सामना किया जा सकता है। शांति और भाइचारे की स्थापना के लिए सहिष्णुता के गुण हमें अपनाना चाहिए। यह बातें मैट्स यूनिवर्सिटी के कला एवं मानविकी अध्ययनशाला, हिन्दी विभाग के अंतर्गत संचालित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति केंद्र द्वारा आयोजित वेबीनार में विषय विशेषज्ञों ने कहीं।
मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने बताया कि मैट्स यूनिवर्सिटी के कला एवं मानविकी अध्ययनशाला के अंतर्गत महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति केंद्र की स्थापना की गई है। केंद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के अवसर पर विश्व शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से वेबीनार के माध्यम से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता महाराष्ट्र के जलगांव स्थित डॉ. अण्णासाहेब जी.डी. बेंडाले महिला महाविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्राध्यापक डॉ. रुपाली दिलीप चौधरी थीं। मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, श्री कृष्ण, कबीर सहित अनेक महापुरुषों के अनगिनत प्रसंग हैं जिनसे यह पता चलता है कि अपनी माधुर्यता और सहिष्णुता से उन्होंने हर संकट का सामना किया। सहिष्णुता के गुण तो प्रकृति में भी विद्यमान हैं। चंदन का वृक्ष अपने को कुल्हाड़ी द्वारा काटे जाने पर भी कुल्हाड़ी को सुगंधित किए बिना नहीं रहता है। यह चंदन-वृक्ष की सहनशीलता का अनुपम उदाहरण है।
डॉ. रूपाली दिलीप चौधरी ने महाराणा प्रताप, अकबर सहित इतिहास के अनेक प्रसिद्ध पात्रों का उदाहरण देते हुए सहिष्णुता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को एक कुटुंब की तरह मानकर हर व्यक्ति, परिवार, समाज, नगर, राज्य और हर देश को सहिष्णुता को अपननाना चाहिये तभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस दिवस को मनाने की सार्थकता होगी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. के.पी. यादव ने कहा कि विश्व में शांति और सौहार्द को कायम रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 16 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है। देश और दुनिया में हिंसा, उपद्रव, जातिभेद, मानवाधिकारों का हनन, महिला अत्याचार आदि घटनाएं हो रही हैं जो विकास की दिशा में सबसे बड़ी बाधा है। विकासशील देश से विकसित देश बनने के लिए हमें सहिष्णुता जैसे गुणों को अपनाना चाहिए। सहिष्णुता को हम समाज का आधार मान सकते हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में अलग - अलग संस्कृति के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं जिसके मूल में सहिष्णुता और सद्भाव है।
इसके पूर्व स्वागत भाषण देते हुए समारोह की आयोजक हिन्दी विभाग की प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने कहा कि सहिष्णुता का अर्थ होता है सहन करना और धीरज रखना। धैर्य जैसे गुण व्यक्ति को सफल बनाते हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी में सहिष्णुता का ही गुण विद्यमान था जिसके बल पर उन्होंने अनेक संघर्षों का सामना किया और जीत हासिल की। भावी पीढ़ी को सहिष्णुता और विश्व शांति का संदेश देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस पर यह विशेष व्याख्यान आयोजित है।
इस अवसर पर विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन शेख, हिन्दी विभाग के प्राध्यापकगण डॉ. कमलेश गोगिया, डॉ. रमणी चंद्राकर, डॉ. सुनीता तिवारी, श्रीमती मधुबबाला शुक्ला, श्रीमती सुष्मिता मिश्रा, चंद्रेश चौधरी सहित सहित यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण उपस्थित थे। मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया, उपकुलपति डॉ. दीपिका ढांढ, कुलसचिव श्री गोकुलानंदा पंडा ने अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए आयोजन की सराहना की।