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वायरल बीमारियों को रोकने के लिए विशेष शोध समिति जरुरी


भविष्य में रुकना चाहिए वैज्ञानिक का पलायन

 नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। न केवल भारत में बल्कि दुनिया में भी पिछले दो वर्षों से कोरोना, ओमीक्रोन आदि रोग तेजी से फैलते जा रहे  हैं, जिसके परिणामस्वरूप करोड़ों नागरिक संक्रमित होते हैं, जिनसे गंभीर रूप से संक्रमित की मृत्यु हो जाती है। शेष जिन्हें निगेटिव माना गया है। पुरानी वायरल बीमारी अभी पूरी तरह खतम नहीं हुई है।

लेकिन भविष्य में यह बात होनी चाहिए कि जब पता चलता है कि किसी व्यक्ति को कोरोना हो गया या उसके बाद ऐसी बीमारी फैल गई तो वह व्यक्ति कुछ समय के बाद उस  दुष्प्रभाव से मुक्त हो जाता है। इसके बाद पिछली बीमारी के कुछ दुष्परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार कुछ वायरल विशेषज्ञ वैज्ञानिक और शोध संस्थान बनाए। जिससे हम बहुत से गंभीर वायरल रोग प्रसार पर आसानी से नियंत्रण कर सकते हैं।

लेकिन आजकल एक से बढ़कर एक उप-रोग  की खोज हो रही हैं।ओमाइक्रोन की तरह और कोई बीमारी नहीं फैलना, उसके लिए हमारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए कुछ वायरल रोग विशेषज्ञ टीम डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए अब कमर कसने की जरूरत है। भारत में इतने सारे वायरोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं ,भारत सरकार को उनमें से नियुक्ति करनी चाहिए। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने इस प्रकार के विशेषज्ञ से अभी तक ना तो कोई मदद नहीं ली और ना ही ऐसे वायरोलॉजिस्ट से वायरल डिजीज के प्रसार को रुकने के लिए कोई चर्चा नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से अनुरोध है कि वायरल रोगों के प्रसार को रोकने और नियंत्रण के लिए वायरोलॉजिस्ट की समिति नियुक्त करें। जो वायरल बीमारियां को रोकने के लिए  जानकारी दे सके। 

जैसा कि भारत के पहले ही 60 प्रतिशत युवाओं ने वैक्सीन की खुराक ले ली है। हमने अपने देश को कोरोना के स्प्रेड से भले ही सुरक्षित कर लिया हो लेकिन नए वायरल संक्रमण के लिए वायरोलॉजिस्ट की मदद लेना आवश्यक और उपयोगी होगा। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हमारे सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, शोध धारक, वायरोलॉजिस्ट हमारे देश में कोई  सम्मान नहीं होने के कारण यूएसए, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, सिंगापुर आदि में बस गए। इसलिये वायरोलॉजिस्ट, वैज्ञानिक, शोधार्थी आदि को सम्मान देना चाहिए। निश्चित रूप से हम भविष्य में अगली आनेवाली सभी वायरल बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं।उसके लिए जरुरी हो प्रयोगशाला, उपकरण, मशीन की सुविधा भी जरूरी है।
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