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आत्मा की भावना कविता है : डाॅ. प्रतिभा येरेकार



नागपुर/पुणे। कवि मन संवेदनशील होता है। वह अपने हृदय के भावों को व्यक्त करता है। अत: आत्मा की भावना ही कविता होती है, इस आशय का प्रतिपादन महाराष्ट्र के नांदेड जिले के धर्माबाद के स्थानीय लाल बहादूर शास्री महाविद्यालय की हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. डाॅ. प्रतिभा जी येरेकार ने किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. की तमिलनाडु इकाई के तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय आभासी काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में वे अपने विचार प्रकट कर रही थी।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज उ.प्र. के अध्यक्ष डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता की। डाॅ. येरेकार ने आगे कहा कि कविता साहित्य की ऐसी विधा है, जिसका आरंभ साहित्य के आरंभ के साथ हुआ है। सुंदर अर्थों को प्रकट करनेवाली उक्ति कविता होती है।भाव व कला पक्ष को लेकर कविता लिखी जाती है।

काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि  हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण विधा  कविता लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचकर जनमानस के अंतरमन पर आज विराजित है। आज की हिंदी कविता समसामायिक विषयों से प्रेरित  होकर समाजदर्शन व समाज मार्गदर्शन का भी दायित्व निभा रही है। विशिष्ट अतिथि डाॅ. अर्चना चतुर्वेदी, इंदौर, म.प्र. ने कविता की विशेषताओं तथा उपादेयता पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने काव्यगोष्ठी के उद्देश्य एवं संस्थान की समस्त विविध गतिविधियों पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ डाॅ.अशोककुमार द्विवेदी, चेन्ने द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। काव्यगोष्ठी का नियंत्रण व संचालन डाॅ.सुनील पाटील ने किया तथा गोष्ठी की सफल संयोजिका डाॅ.जैनब बी, चैन्ने ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

प्रस्तुत काव्य गोष्ठी में कवियों द्वारा कविता पाठ किया गया।डाॅ. ए.भवानी ने सुनाया - 'बहुत दिनों के बाद मन  में एक खयाल आया। कविता लिखने को कहा गया है... सोचा, विचारा, क्या लिखूँ, प्रश्नचिन्ह था मेरे अागे।' डाॅ. अशोककुमार द्विवेदी,चैन्ने ने अपनी गजल प्रस्तुति में कहा - 'खुदा के दर पे खंजर नहीं निकलते हैं, कैद बुलबुल के कभी पर नहीं निकलते हैं'। डाॅ. मुहम्मद साहिदुल इस्लाम कहते हैं कि - 'तुम्हारी प्रेम भरी नजरों से नजर मिलाने के बाद, प्रण लिया था, तुम्हारी जिंदगी के बोझ उठाने का।' पुदुच्चेरी से डाॅ. के कविता लिखती है- 'प्रवंचना व महामारी के फैलाव, यह पर्यावरण है मजबूर सांच, प्रलयकाल के मनु हम सब यह नितांत सच। 

डाॅ. अनिता पाटिल, चैन्ने ने सुनाया - 'हर घर की खुशी में परिवारों का आधार। इस भूलोक में मानवता का उपहार'। के. इंद्रायणी परमपत्ति, नामक्कल सुनाती हे-'नारी है जग में ईश्वर की सबसे उत्तम सृष्टि, बीमारी है मन की उस पर नर की क्लीव दृष्टि'। डाॅ. निशा मुरलीधरन, चैन्ने से 'पहला पहला प्यार' कविता में प्रस्तुत करती है-'उसके अविचल शरीर को एक नाम दिया गया, और उसे ' स्टिल बोर्न बेबी' पुकारा गया। 'डाॅ. डाॅली कहती है-'मन तलाश करता है अनजानी मंजिल खोज लिया करता है। बैचैन होकर, जानी पहचानी दिशाएँ, अनजानी राहें'। 

डाॅ. गुडिया चौधरी, चैन्ने कहती है - सुंदरता को सबने महलों में देखा, भव्य मंदिरों में देखा, खेतों में देखा, खलिहानों में देखा, पर नहीं देखा उन गलियों में'। राज शेखर,चेन्नै लिखते हैं कि, 'बारिश की आशंका देख नारद मुनि विचलित हुए, बात उदर में पची नहीं, शीघ्र इंद्रासन पहूँच गए'। डाॅ. सुनील पाटिल चैन्ने, कहते हैं - मानवी अंतर्कथाएँ बहुत प्यारी है पागल प्रतीकों में कहीं जाती हुई एक त्रासदी है'। प्रो. एस. प्रसन्नादेवी, तिरूचिरापल्ली से लिखती है- 'स्वयं बारिश हुई पर, अघुलनशील पहाड जैसै मेरी खिडकी की ओर पुरानी यादों से उत्कंठा'। डाॅ.राजलक्ष्मी कृष्णन, चैन्ने लिखती है, मैं राष्ट्र की वंदना करती हूँ, आराधना करती हूँ। भारत मेरा राष्ट्र, भारत ही मेरी जन्मभूमि।
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