राष्ट्र के प्रति अंतःकरण में चेतना होनी चाहिए : डॉ. शहावुद्दीन शेख
नागपुर/पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज की बाल संसद इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम विषय - 'श्री पंडित मदन मोहन मालवीय जी, पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी, श्री विक्रम साराभाई जी, और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी' पर अध्यक्षीय भाषण में संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख ने मंतव्य देते हुए कहा कि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने राजनीति में रहकर भी राजनीति का उपयोग स्वहित के लिए कदापि नहीं किया।
बाजपेई जी के व्यक्तित्व में संवाद, वाक्पटुता, शालीनता तथा लोगों को देने के लिए सम्मान था। वे उदारवादी व्यक्तित्व के धनी थे और छल कपट से दूर रहे। लोकतंत्र के शाश्वत मूल्यों पर उनका अपार विश्वास था। राजनीति में रहकर भी उन्होंने अपने व्यक्तित्व को अलग रखा। जीवन की आपाधापी में भी वे कविता लिखते थे।
गांधी जी ने मदन मोहन मालवीय जी को भारत का निर्माता कहा था। मालवीय जी सत्यता, देशभक्ति और आत्मनिष्ठा के अद्वितीय उदाहरण थे। हिन्दी एवं नागरी लिपि के उत्थान में उनकी भूमिका अद्वितीय रही।
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के बारे में कहा कि, उनकी रचना में राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रीय भावना दिखाई देती है। उनकी संपूर्ण रचनाओं में युगबोध और राष्ट्रीयता परिलक्षित होती है। डॉ. शेख ने मैथिली शरण गुप्त जी की कविताओं की कुछ पंक्तियां 'हम क्या थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी, आओ विचारें मिलकर यह समस्याएं सभी।' को भी रेखांकित किया। उनकी लेखन की विशेषता बताते हुए कहा कि, नारी अधिकारों के भी वे सजग प्रहरी रहे। उन्हें राष्ट्र का गौरव माना जाता है।
मुख्य अतिथि - अनुप्रिया वार्ष्णेय, महाराष्ट्र ने कहा कि, सफलता हर किसी के जीवन का लक्ष्य है। देश की महान विभूतियों के कारण ही भारत ने अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में स्थान प्राप्त किया है।
विशिष्ट अतिथि - श्रीमती ज्योत्सना दीक्षित, उपमहाप्रबंधक, राइट, गुड़गांव, हरियाणा ने कहा कि, बच्चे जब किसी कार्य में भाग लेते हैं तो , उस कार्य में सफलता या असफलता को अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिए। जब कभी असफल हो भी जाऐं तो, स्वयं मौन रहकर स्वयं से बात करें और उन बातों में हमेशा सकारात्मक रहें। अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखते हुए कार्य करने का प्रयास करें।
निमिष दाभाड़े, महाराष्ट्र ने काव्य पाठ किया - 'गीत नहीं गाता हूं, वेनकाब चेहरे में अपनों के मेले में, मीत नहीं पाता हूं'। दोहांजलि में - वेदश्री लवेकर , महाराष्ट्र ने गुनगुनाया 'हरदम सेवा राष्ट्र की था जीवन का ध्येय।' भक्ति शाखावार, महाराष्ट्र ने मदन मोहन मालवीय जी पर रोचक प्रसंग सुनाया। श्रद्धा उत्पात, महाराष्ट्र ने 'नर हो न निराश करो मन को, कुछ काम करो कुछ काम करो' कविता सुनाई। गौरी दौड़ ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी का जीवन परिचय सुनाया।
संचित सिंह, इंदौर, मध्य प्रदेश ने मैथिलीशरण गुप्त जी की 'पंचवटी' कविता सुनाई। शौर्य सिंह कुशवाह, मध्य प्रदेश ने विक्रम साराभाई जी के जीवन के बारे में बताया। अद्विका कुशवाह, मध्य प्रदेश ने 'पंचवटी' कविता में लक्ष्मण जी के त्याग का वर्णन किया। रुशील सोनी, मध्य प्रदेश ने कहा - 'जो वर्षों तक लड़े जेल में उनकी याद करें, जो फांसी पर चढ़े खेल में उनकी याद करें। अवनी तिवारी, इंदौर, मध्य प्रदेश ने गाया 'कदम मिलाकर चलना होगा, बाधाऐं आती हैं तो आऐं, आग लगा कर चलना होगा।'
संस्था सचिव डॉ. गोकुलेश्वर द्विवेदी जी द्वारा प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम करवाया गया, जिसमें शुभ द्विवेदी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
विधी पाराशर, भोपाल, मध्यप्रदेश ने श्री विक्रम साराभाई जी का जीवन परिचय सुनाया।
अनिक मेमन, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने 'पंचवटी' कविता सुनाई। दीक्षा निर्मलकर, छत्तीसगढ़ ने 'स्वतंत्रता की पुकार' कविता सुनाई। सरोजिनी वर्मा, देवरी, छत्तीसगढ़ ने भी काव्य पाठ किया। ऋषिता तिवारी, भाटापारा छत्तीसगढ़ ने 'मौत से ठन गई' का काव्य पाठ किया।
सरस्वती वंदना वाद्य यंत्रों के साथ मंत्र एवं मैत्री बुधौलिया दतिया मध्य प्रदेश ने की एवं स्वागत भाषण डॉ सुनीता यादव औरंगाबाद बाल संसद प्रभारी महाराष्ट्र ने, आभार प्रदर्शन डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद राष्ट्रीय प्रभारी बाल संसद ने किया।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन शार्दुल कुमार जाधव औरंगाबाद महाराष्ट्र ने किया।
सहयोगी-श्रीमती ज्योति तिवारी, प्रभारी, मध्य प्रदेश एवं श्रीमती पूर्णिमा कौशिक, प्रभारी, छत्तीसगढ़ रहीं
कार्यक्रम में श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव, श्रीमती विभा पाराशर, श्रीमती दीप्ति शर्मा, श्री लक्ष्मण जी, डॉ सिन्हा आदि अन्य अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।