नागपुर विश्व टूरिस्ट सेंटर बन सकता है
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सर्वधर्म समभाव का दर्शनीय स्थल
नागपुर। गोंडकालीन, भोंसलेकालीन नागपुर का ऐतिहासिक महत्व है। साथ ही जियोग्राफिकल सेफ्टी प्लेस के व्यू से नागपुर जीरोमाइल नेशनल प्लेस नहीं होकर अब वर्ल्ड टूरिज्म महामेट्रो की परिधि में भी आ रहा है। भारत के सभी भागों से नागपुर में चाहे मध्य भारत से हो या कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी प्रकार के नागरिक निवास करते हैं। विशेष रूप से सी पी और बरार से समय के दौरान जब नागपुर मध्य भारत की राजधानी थी।
पुराने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, लुधियाना, महाराष्ट्र, असम, कश्मीर, कर्नाटक, लद्दाख, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, सिंध, हिमाचल प्रदेश, पंजाब यानी सभी 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी नौकरी की तलाश में नागरिकों के साथ-साथ गैर-निवास भी यहां आ चुके है। विशेष रूप से और अधिकतर बिना जाति भेदभाव के नागपुर में रहने वाला व्यक्ति सभी हिंदी राष्ट्रीय भाषा में बोल रहे हैं।
हम कह सकते हैं कि मिनी इंडिया निवास स्थान नागपुर ही है। आज हमारा शहर अच्छी तरह से बसने जा रहा है। जहां मेट्रो, वर्ल्ड क्लास एयरपोर्ट, वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन, सभी प्रकार की सड़क परिवहन सुविधाएं पहले ही विकसित हो चुकी हैं। सुजलम, सुफलाम, सत्यशामला मातरम की तराह नागपुर शहर भविष्य में भारत की अगली राजधानी होगी। विश्व के प्रमुख सिटीज सिंगापुर, दुबई, कैलिफोर्निया की तरहः विश्व स्तरीय शहर की श्रेणी मे निश्चित रूप से रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब जब की वह दिन दूर नहीं यहां आईटी हब, मेडिकल हब, विश्व व्यापार व्यापार केंद्र भी कुछ ही वर्षों में स्थापित हो जाएगे। अत: हम कह सकते हैं कि नागपुर कुछ वर्षों में विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल होगा।
- आनंदमनोहर जोशी