साहित्य की लोकप्रिय विधा है कविता : डाॅ. शहाबुद्दीन शेख
https://www.zeromilepress.com/2021/12/blog-post_970.html
नागपुर/पुणे। साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में आज कविता लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच चुकी है, ये विचार विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने व्यक्त किये।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उ. प्र. के तत्वावधान में केरल इकाई द्वारा आयोजित आभासी काव्य गोष्ठी में वे अध्यक्षीय उद्बोधन दे रहे थे। डाॅ. शेख ने आगे कहा कि ताल, छंद व गेयता के कारण कविता हर एक को आकर्षित करती है। वर्तमान परिवेश में काव्य लेखन की प्रवृत्ति दिनोंदिन बढती जा रही है। परिणामत: कविता मनोरंजन व उपदेश का माध्यम बनती जा रही है।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज के सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने अपने प्रास्तविक भाषण में काव्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए काव्य की विशेषताओं की भी चर्चा की। श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव 'लहर', लखनऊ तथा प्रा. पूर्णिमा झेंडे, नाशिक, महाराष्ट्र द्वारा अतिथि मंतव्य दिए गये। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कु. आभा आर. वी. की सरस्वती वंदना से हुआ। डाॅ. शबाना हबीब ने स्वागत भाषण दिया। डाॅ. निम्मी ए. ने काव्य गोष्ठी का संचालन किया तथा डाॅ. प्रिया ए, पांपाडी, केरल ने धन्यवाद ज्ञापन किये।
काव्य गोष्ठी में अनेक कवि- कवयित्रियों द्वारा काव्य प्रस्तुति दि गई। डाॅ. लता डी. ने अपनी कविता के माध्यम से कहा, 'तुहिन कणों का करना चाहा संचय उतनाही विशुद्ध रूप बनाने प्रिया का', डाॅ. जे उमा कुमारी ने कहा कि, 'वे ही अपने अस्तित्व की चिंता में दौडते, भटकते, उडते, फिरते हैं, इस धरती का दुख भला कौन देखेगा?' क्रिस्टीना षेरिन रोज के जे ने प्रस्तुत किया कि, 'जिनके बेरंग वर्दी से हमारी जिंदगी रंगी है, जिनके सौ कोस दूर के घर से बना है हमारा आशियाना।' श्रीमती रंजनी जी नायर ने कहा कि, तीव्र आवेग उमडने से, जीवन की आशा जगने से साकार हुए सपने सारे, संपूर्ण हुआ मैं एक बार फिर।
डाॅ. सजिना पी. एस ने कहा कि 'निराली है तू संस्कृति देती है सबको मान सम्मान।' श्रीमती सानिका राज ने प्रस्तुत किया कि, गरीबी, प्रदूषण, बाढ, अत्याचार, कोरोना तुम सब को हमेशा के लिए यहाँ से जाना।' श्रीना एस ने कहा कि, 'मैं खुश हूँ क्यों कि मैं प्रवासी हूँ, इन रंगहीन पसीनों से मेरे बच्चों के सपनों को रंगीन बनाना चाहता हूँ।
रश्मि श्रीवास्तव 'लहर' लखनऊ ने कहा कि, 'सुलगते हैं सपने, नयन ताकते हैं, हम आशा संजोए कदम साधते हैं।' श्रीमती रेश्मा एम. एल, कु. अश्विनी सुमा, डाॅ. रश्मि कृष्णन, शीला कुमारी, प्रिया, अकीला, आदि द्वारा भी अपनी कविताएँ प्रस्तुत की गई।