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संक्रांति एक, रंग अनेक...


महिला चेतना मंच की सफल रही परिचर्चा

नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में अंतरंग महिला चेतना मंच के पाक्षिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में 'संक्रांति एक, रंग अनेक' शीर्षक पर परिचर्चा रखी गई। नए वर्ष और संक्रांति के उपलक्ष्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रिया सिन्हा की मधुर आवाज़ में सरस्वती वंदना द्वारा हुई। अंतरंग संयोजिका श्रीमती सुनीता गुप्ता ने प्रस्तावना रखी। 

वरिष्ठ साहित्यकार इंदिरा किसलय के शब्दों की जादूगरी रुपी अध्यक्षीय भाषण ने सभी को  मंत्रमुग्ध कर लिया और सह संयोजिका डाॅ स्वर्णिमा सिन्हा ने अपने रोचक व मोहक संचालन से श्रोताओं का दिल जीत लिया। महिलाओं की खुशी, उत्साह व उमंग देखने लायक थे। संयोजिका शगुफ्ता क़ाज़ी और सह संयोजिका रंजना श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराईं।

कार्यक्रम में लक्ष्मी वर्मा का नृत्य और मधुबाला श्रीवास्तव का सुमधुर गीत सुनकर सखियां झूम उठीं। क्रमशः श्रीमती पुष्पा पाण्डेय, रेखा तिवारी, पूनम बहल, अलका देशपांडे,  सरोज गर्ग, माया शर्मा, निर्मला पाण्डे, रश्मि भूमरालकर, डॉ शीला भार्गव, रेशम मदान, ऋतु असई, अपराजिता राजोरिया, रत्ना जयसवाल, उमा हरगन, हेमलता मिश्रा, मधु सिंघी, किरण हटवार, आरती पाटिल, संतोष बुधराजा, संगीता अंजुम ने मकर संक्रान्ति के प्रादेशिक एवं वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। 

इसे सूर्योपासना का पर्व कहा गया। नदी स्नान, दान, मोक्ष, पतंगोत्सव एवं प्रासंगिक रूप से इसके खगोलीय एवं पौराणिक महत्व की भी चर्चा की गई। सभी के उत्साह व उमंग से कार्यक्रम में चार चांद लग गए। रश्मि मिश्रा ने आभार प्रदर्शन किया।

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