साहित्यिकी में गूँजी नववर्ष की कविताएँ
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा नववर्ष के उपलक्ष्य में साहित्यिकी में कविसम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ भोला सरवर का स्वागत सतीश लाखोटिया ने अंगवस्त्र से किया। संचालन संयोजक आदेश जैन ने किया।
सर्वप्रथम नववर्ष के उपलक्ष्य में युवराज चौधरी ने अपनी रचना के माध्यम से नववर्ष का स्वागत किया। सम्मेलन में रमेश मौन्देकर ने 'बस्ती सुनाये देश सुनाये' सतीश लाखोटिया ने 'बीत जाएगा आपका साल' चंद्रकला भरतिया ने 'नए साल में नई कहानी हम लिखेगे. नीलिमा गुप्ता ने 'भारत भूमि का वीर' डॉ भोला सरवर ने 'जोड़ा जो बून्द बून्द समंदर बना दिया' शमशाद शाद 'इश्को वफ़ा के फूल खिलाएंगे. मीरा जोगलेकर ने 'संकल्प नए साल के' रूबी दास 'बिदा हो गया दिसंबर'
गुलाम मोहम्मद खान आलम ने 'अब नही रहता कोई अच्छे दिन की याद में' कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 'नववर्ष पर कविता'. संजीव बहादुर ने 'बड़ा फल फूल रहा धर्म का धंधा' उमर अली अनवर ने 'मेरी आँखों मे जब नमी आयी' गौरी कनोजे ने 'सालों का हिसाब क्या रखें' सुनील कुमार निखारे ने 'नववर्ष संदेश' जैसी कवितायें सुनकर कवि सम्मेलन का माहौल बहुत ही खुशनुमा कर दिया। विशाल ख़र्चवाल,भरत गौरकर ने नववर्ष पर सभी को बधाई देते हुए अपनी उत्कृष्ट कविता प्रस्तुत की।