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युवा वर्ग को निराशा की खाई से निकलना होगा : प्रो. कल्पना गवली


नागपुर/पुणे। निराशा की खाई में गिरे आज के युवा वर्ग को खाई से बाहर निकलकर अपने अस्तित्व की पहचान बनाई रखनी होगी। ये विचार महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा, गुजरात की हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. कल्पना गवली ने व्यक्त किये। स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन के अवसर पर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के तत्वावधान में ‘युवा संसद’ के गठन के समय वे मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन दे रही थीं। 

समारोह की अध्यक्षता विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने की। प्रो. कल्पना गवली ने आगे कहा कि आज का युवा जब वास्तव में युवा बनेगा, तब उसकी सारी समस्याएँ अपने आप दूर हो जाएँगी। वह मात्र डिग्रीधारी न बने। विनम्रता, जिज्ञासा के साथ वह दयालु व कृपालु होकर जिये। भारतीय संस्कृति में व्यक्ति की पहचान उसके परिधान से नहीं, चरित्र से होती है। व्यक्ति के विचारों में महानता होती है। दुख इस बात का है कि हमारे विचारों में पंगुता है। युवक विचार मंथन करें। 

समय बहता नीर है, उसका सदुपयोग करें। आत्मविश्वास को बढ़ाएँ। बड़ी-बड़ी इमारतें निर्माण हो रही हैं, पर युवाओं का निर्माण नहीं हो पा रहा। वास्तव में चलते रहना ही जीवन है। जितना बड़ा संघर्ष होगा, उतनी ही बड़ी जीत होगी। युवा वही है, जो पत्थर को लात मारे और पानी निकाल दें। युवाओं का व्यक्तित्व समाजहित में हो। विशिष्ट अतिथि अंशुल गौरहा, बिलासपुर, छ. ग. ने कहा कि धर्म, संस्कृति व देश के लिए स्वामी विवेकानंद जी ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी जी ने अपने मंतव्य में संस्थान की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवा संसद गठन के उद्देश्य को समझाया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि स्वामी विवेकानंद अपने जीवनकाल में युवकों के लिए एक प्रेरणास्रोत थे और वर्तमान में भी उनके विचार युवा वर्ग को प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना था कि, हम वही बनते हैं, जो हमारे विचार हमें बनाते हैं। स्वयं को दुर्बल समझना सबसे बड़ा पाप है। 

इस अवसर पर डॉ. मुखत्यार शेख, बिड़कीन, महाराष्ट्र, सूर्यकांत भारद्वाज, बिलासपुर, छ. ग., डॉ. शेख अंसार पाशा, मुंबई, आसमा मकबूल बेग, कोल्हापुर, महाराष्ट्र, गजराज श्रीवास, सुरेश राठोड, हैदराबाद, तेलंगाना ने अपने विचार प्रस्तुत किये। हिमांशु चतुर्वेदी, कोरबा, छ. ग. ने काव्यपाठ तथा अजय यदु, बिलासपुर, छ. ग. ने गीत प्रस्तुत किया। सुश्री डिंपल वैष्णव व ऋचा वैष्णव कोरबा, छ. ग. ने मिक्स  मार्शल आर्ट की प्रस्तुति की।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के युवा संसद प्रभारी लक्ष्मीकांत वैष्णव, चांपा, जांजगीर, छ. ग. ने स्वागत भाषण दिया। बद्री सिंह चौहान, कबीधाम, छ. ग. ने समारोह का संचालन किया तथा युवा संसद अध्यक्ष डॉ. ज़हीरुद्दिन पठान, नांदेड, महाराष्ट्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।  
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